डीडीसीए चुनाव : पार्टियों और आरोप प्रत्यारोपों का दौर जोरों पर दलगत राजनीति की चपेट मे !

डीडीसीए चुनाव :
पार्टियों और आरोप प्रत्यारोपों का दौर जोरों पर
दलगत राजनीति की चपेट मे !

नई दिल्ली / राजेंद्र सजवान
उस समय जबकि पूरी दुनिया पर विश्व कप फुटबॉल का बुखार चढ़ा हुआ है, भारत की राजधानी दिल्ली क्रिकेट की तपिश महसूस कर रही है|30 जून को होने वाले डीडीसीए चुनाओं को लेकर गहमा गहमी का माहौल है|देर रात चलने वाली पार्टियों का दौर चल रहा है और तीन अलग अलग गुट क्रिकेट के अच्छे दिनों का झांसा देकर वोट बटोरने के लिए छल छदम का पुराना खेल खेल रहे हैं|सभी का नारा सॉफ सुथरा प्रशासन,क्रिकेट को प्राथमिकता और सदस्यों एवम् क्लब हाउस की बेहतर देखरेख करना है|लेकिन इस प्रकार के नारे तो वर्षों से दिए जा रहे हैं|वादे किए जाते हैं और सता मिलने के साथ ही सब कुछ भुला दिया जाता है|

मैदान मे उतरे एक गुट की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ एड्वोकेट विकास सिंह कर रहे हैं|उनके साथ महासचिव पद के लिए संदीप चौधरी और क्रिकेट निदेशक पद के लिए पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिककेटर सुरिंदर खन्ना है|दूसरे गुट से शीर्ष पद के दावेदार वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा हैं,एसपी बंसल और विनोद तिहारा जैसे नाम उनके पैनल मे हैं|तीसरे गुट के अध्यक्ष पद के लिए पूर्व क्रिकेटर मदन लाल ने ताल ठोकी है|इस धड़े को पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी और उतर प्रदेश सरकार के मंत्री चेतन चौहान और क्रिकेट बोर्ड के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना का सपोर्ट बताया जा रहा है|

दिल्ली की क्रिकेट के लिए एक अच्छी बात यह हुई है कि अब प्राक्सी कुप्रथा समाप्त हो गई है|सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों और लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के लागू होने के बाद से बहुत सी अनियमितताओं और धांधलियों का अंत हो चुका है|अर्थात झोले मे वोट डाल कर जीत का जश्न मनाने वाला दौर गुजर चुका है| नतीजन अब साफ सुथरे चुनाओं की उम्मीद की जा रही है|लेकिन आरोप प्रत्यारोप बराबर लगाए जा रहे हैं|कोई परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहा है तो कोई कह रहा है कि दलगत राजनीति डीडीसीए चुनाओं मे हावी हो गई है जिसमे देश के दो बड़े दल सीधे सीधे शामिल बताए जा रहे हैं|फिरभी सदस्यों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि क्रिकेट से जुड़े मदन लाल ,सुरिंदर खन्ना ,विनोद तिहारा और अन्य खिलाड़ियो को प्रमुखता दी जाए और पैनल की बजाय पद और प्रत्यासी के नाम पर गौर किया जाय तो एक अच्छी टीम सामने आ सकती है|

इस बार के चुनावों मे एक अलग बात यह देखने मे आई है कि दिल्ली और बाहरी प्रदेशों के जानेमाने और नामी क्रिकेटरअपने साथी रहे खिलाड़ियों के समर्थन मे खुल कर बोल रहे हैं और उन्हें जिताने के लिए अपील कर रहे हैं|पता नहीं उनकी अपील किस हद तक सुनी जाती है!ख़ासकर मदन लाल और सुरिंदर खन्ना को को उनके साथियों ने याद किया है|अब देखना यह होगा कि ऊँट किस करवट बैठता है!

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