एशियाड मशाल जली: खेल मंत्री की अनुपस्थिति जैसे आग मे घी !

एशियाड मशाल जली: खेल मंत्री की अनुपस्थिति जैसे आग मे घी !

राजेंद्र सजवान
राजधानी के ध्यान चन्द नेशनल स्टेडियम मे प्रज्वलित एशियाई खेलों की मशाल जकार्ता की यात्रा पर निकल गई है | आज यहाँ आयोजित एक सदा समारोह मे भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डाक्टर नरेंद्र ध्रुव बत्रा, महासचिव राजीव मेहता,एशियाई ओलंपिक काउन्सिल के पूर्व सचिव राजा रणधीर सिंह, भारत सरकार के खेल सचिव राहुल भटनागर, साई महानिदेशक नीलम कपूर और इंडोनेशिया के राजदूत एवम् एशियाई खेलों की आयोजन समिति के अधिकारियों की उपस्थिति मे एशियाई खेलों की ज्योति को रवाना किया गया| लेकिन इस एतिहासिक अवसर पर खेल एवम् युवा मामलों के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर की अनुपस्थिति चर्चा मे रही |हालाँकि एक दिन पहले डाक्टर बत्रा ने उनके नहीं आने के बारे मे मीडिया को सूचित किया था और साथ ही पूर्व खेल मंत्री विजय गोयल के मौजूद रहने की संभावना जतलाई थी | लेकिन वह भी नहीं आए| ज़ाहिर है कहीं ना कहीं कोई गड़बड़ है और खेल मंत्रालय और आईओए के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे |इंडोनेशिया के प्रतिनिधि मंडल ने भी खेल मंत्री की गैरमौजूदगी को हैरानी से लिया |

खैर ,आईओए की अगुवाई मे 18 वें एशियाई खेलों के मेजबान राष्ट्र इंडोनेशिया की महानतम बैडमिंटन खिलाड़ी सुसी सुशांति ने सबसे पहले मशाल ग्रहण की|भारतीय खिलाड़ियों का नेतृत्व ओलंपिक पदक विजेता और पाँच बार की विश्व चैम्पियन मैरी काम ने किया | उनके बाद हॉकी टीम के गोलकीपर श्रीजेश ,निशानेबाज़ जीतू राय ,मुक्केबाज़ सरिता देवी,पहलवान पूजा काद्यान,कबड्डी खिलाड़ी अनूप कुमार,निशानेबाज़ समीर जंग,हॉकी ओलंपियन सरदार सिंह ,सुनील एसवी ,मुक्केबाज़ मनोज कुमार,टीटी खिलाड़ी मणिका बत्रा सहित तीस जाने माने खिलाड़ियों ने नेशनल स्टेडियम से शुरू हुई रीले मे भाग लिया | उनके साथ देशभर से आए खिलाड़ी भी दौड़े |

उल्लेखनीय है कि इसी स्टेडियम पर 1951 मे पहले एशियाई खेलों का शुभारंभ हुआ था| यहीं पर भारतीय फुटबॉल टीम ने स्वर्ण पदक जीता| तत्पश्चात हर एशियाई खेल की मशाल यात्रा यहीं से शुरू होती आई है | अर्थात मौका एतिहासिक और अति संवेदनशील कहा जाएगा ,जिसमे खेल मंत्री की गैर मौजूदगी को लेकर अलग अलग कयास लगाए जा रहे हैं | डाक्टर बत्रा और राजीव मेहता ने पूछे जाने पर बस इतना ही कहा कि मीडिया फिलहाल आयोजन के महत्व को समझे और खेल मंत्री की विवशता के बारे मे उन्हीं से पूछे |

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