नेहरू हॉकी:रक्षक बने भक्षक

नेहरू हॉकी:रक्षक बने भक्षक

नई दिल्ली / राजेंद्र सजवान ,
देश का सबसे बड़ा और खिलाड़ियों का सबसे पसंदीदा हॉकी टूर्नामेंट ‘नेहरू कप’ बंद होने की कगार पर है | यदि ऐसा होता है तो प्रमुख आयोजन के साथ सब जूनियर बालक,जूनियर बालक-बालिका टूर्नामेंट और चैम्पियंस कॉलेज आयोजन सहित कुल पाँच टूर्नामेंट बंद हो सकते हैं | फिलहाल खबर यह है कि मेजर ध्यानचन्द के नाम पर खेला जाने वाला नेहरू ध्यानचन्द इंटर स्कूल टूर्नामेंट का पांचवाँ एडिशन संभव नहीं हो पाएगा | इसे अन्य आयोजनों के लिए ख़तरे की घंटी माना जा रहा है | आयोजन से जुड़े कुछ लोग कहते हैं कि फंड की कमी है | यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ लोगों ने सोसाइटी को कंगाल बना दिया है | दूसरी तरफ सोसाइटी के महासचिव कुक्कू वालिया कह रहे हैं कि ऐसी कोई समस्या नहीं है | आरोप लगाने वाले बेकार चीख चिल्ला रहे हैं | उनके पास एक एक पैसे का हिसाब है |

नेहरू हॉकी टूर्नामेंट सोसाइटी की देख रेख मे पहले नेहरू हॉकी टूर्नामेंट का आयोजन 1964 मे किया गया ,जिसका उद्घाटन विजय लक्ष्मी पंडित ने किया जबकि फाइनल दिवस पर प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने पुरूस्कर बाँटे | आगे भी देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नेहरू हॉकी का आकर्षण रहे| देश के जानेमाने नेताओं,प्रशासकों,चैम्पियन खिलाड़ियों और अन्य वर्गों के शीर्ष अधिकारियों ने इस टूर्नामेंट को लाभान्वित किया | मुख्य टूर्नामेंट मे खेलना तमाम चैम्पियन टीमों का सपना होता था | सीनियर टूर्नामेंट को जीतने मे उत्तर रेलवे,कोर आफ सिग्नल्स,ऑल इंडिया पुलिस ,सीमा बल ,पंजाब पुलिस,एयर इंडिया,इंडियन एयर लाइन्स,पंजाब सिंध बैंक,इंडियन रेलवे इंडियन आयल आदि टीमें सफल रहीं | तमाम ओलंपियन और वर्ल्ड एवम् ओलंपिक चैम्पियन खिलाड़ी नेहरू हॉकी का आकर्षण रहे| बढ़ती लोकप्रियता के चलते सोसाइटी ने स्कूली बालक-बालिकाओं और कॉलेज के आयोजनों को अपने बेड़े मे शामिल किया |

शिव कुमार वर्मा,केजी,कक्कड़,नंदी सिंह,एनएलनारंग,वाई आर खट्टर जैसे कर्मठ हॉकी प्रेमियों ने नेहरू हॉकी को देश-विदेश के खिलाड़ियों का आकर्षण बनाया लेकिन स्वर्गीय वर्मा,कक्कड़ और नंदी सिंह के निधन के बाद नेहरू हॉकी का ग्राफ गिरता चला गया |खचाखच भरने वाला शिवाजी स्टेडियम सूना पड़ गया है | हालाँकि हॉकी प्रेमियों की बेरूख़ी के कई कारण हैं पर पिछले आठ दस सालों से सोसाइटी का रख रखाव कमजोर हाथों मे चले जाने को पतन का बड़ा कारण बताया जा रहा है | कुछ असंतुष्टों ने खातों मे गड़बड़ का आरोप भी लगाया लेकिन नेहरू सोसाइटी के महासचिव कुक्कू वालिया तमाम आरोपों को खारिज करते हैं |

किसी भी संस्था और संगठन के लिए उसके संस्थापक और जन्मदाता आदर्श और प्रेरणास्त्रोत होते हैं लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि उन्हें नेहरू हॉकी के इतिहास और रिकार्डों से पूरी तरह साफ कर दिया गया है | सोसाइटी को जन्म देने वालों और वर्षों तक सम्मान के साथ चलाने वालों का उल्लेख किसी वेबसाइट या रिकार्ड बुक मे नहीं मिलेगा |

कुक्कू कहते हैं कि खर्चे बढ़ गये हैं और प्रायोजक खोजना लगातार मुश्किल हो रहा है| फिरभी खेलजारी रहेगा क्योंकि फंड की कोई कमी नहीं है| लेकिन नेहरू हॉकी से जुड़े तमाम लोगों को एक एक कर बाहर क्यों किया जा रहा है?

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One thought on “नेहरू हॉकी:रक्षक बने भक्षक

  1. बहुत अच्छा लेख।जिस प्रकार सुब्रोतो कप ने अंतरराष्ट्रीय ऊंचाइयों को छू रहा।इन्होंने कभी आगे बढ़ने की कोशिश ही नही की।बस घसीट रहे।

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