उम्र की धोखाधड़ी:फुटबाल को धोखा, देश से धोखा !

उम्र की धोखाधड़ी:फुटबाल को धोखा, देश से धोखा !

नई दिल्ली /राजेंद्र सजवान,
आयोजन चाहे किसी भी आयु वर्ग का हो या युवा एवम् सीनियर टीम किसी भी टूर्नामेंट मे खेले, भारतीय फुटबाल की हार लगभग तय मानी जाती है| फुटबाल जानकारों और पूर्व खिलाड़ियों की माने तो भारतीय फुटबाल मे जब तक उम्र की धोखाधड़ी नहीं रुकती स्तर मे सुधार नहीं हो सकता | फेडरेशन,उसके देसी-विदेशी कोच ,खिलाड़ी और उनके माँ -बाप जानते हैं कि अंडर 17 टीम के गठन मे उम्र का फ्राड जमकर हुआ था | नतीजन तीन से चार बार खिलाड़ियों को बदलना पड़ा |

एक तरफ तो दावा किया जा रहा है कि भारत की फ़ीफ़ा रैंकिंग मे तेज़ी से सुधार हुआ है तो दूसरी तरफ आलम यह है कि महाद्वीपीय आयोजनों मे लगातार हार रहे हैं| यदि सीनियर टीम11-12 मैच जीतने का करिश्मा करती है तो खुश होने जैसी बात नहीं है | ऐसा इसलिए होता हैक्योंकि हम अक्सरकमजोर देशों के विरुढ़ खेलते हैं और बेकार ही शेखी बघारते हैं | यदि अपनी फुटबाल मे दम होता तो एशियाई खेलों मे खेल रहे होते | अर्थात झूठ को चाहे जैसे भी परोसा जाए वह सच नहीं हो सकता | लेकिन यह सच है कि अपने देश मे बड़ी उम्र के खिलाड़ी उधम मचाए हैं |

1951और 1962 मे एशियाई खेलों का स्वर्ण जीतने वाली टीम का हाल यह है कि एशिया मे भी सम्मान की नज़र से नहीं देखा जाता| सरकारें बार बार फुटबाल को बढ़ावा देने का झूठा दावा करती हैं |लेकिन प्रोत्साहन के नाम पर बड़ी उम्र के खिलाड़ियों को टीम मे शामिल किया जाना और 19 साल के उर्जा कप जैसे बेमतलब आयोजन कर उम्र की धोखाधड़ी को बढ़ावा देना फुटबाल का उत्थान कदापि नहीं है|

बेहतर होगा खिलाड़ियों की उम्र को ठोक बजा कर देखा जाए | उन्हें आठ साल से तैयार किया जाए और अगले आठ-दस सालों तक अत्याधुनिक तकनीक मे ढाला जाए| वर्ल्ड कप दूर की बात है | पहले एशियाड और ओलंपिक मे खेलने की पात्रता हासिल करना लक्ष्य होना चाहिए |

हालाँकि फुटबाल फेडरेशन अपने स्तर पर प्रयास कर रही है पर गंभीरता की कमी के चलते कामयाबी नहीं मिल पा रही | इस दिशा मे सभी को मिल कर प्रयास करने होंगे| भारतीय कप्तान सुनील क्षेत्री भी मानते हैं कि छोटी और वास्तविक उम्र के खिलाड़ियों की खोज ज़रूरी है |

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One comment

  1. Ye dhandlebaaji to har state main school level se
    har game main especially hockey, football aur cricket min suru ho jaati hai. Hamare time main bhi hota tha. Balki exam main bhi pass kara dete the. PTI aur Principal ko apne survival ke liye karna hi parta hai. Parents ka bhi is bayeemani main poora haath hai.
    Lekin kalam (lekhni) ka sach likhna nahin rukna chahiye.
    Aisse hi sach likhte raho.
    khelon main gandi politics aur nepotism ko kewal kalam hi ujaagar kar sakti hai.

    Liked by 1 person

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