मज़हब का पता नहीं -लेकिन ‘खेल नहीं सिखाता आपस मे बैर रखना’

मज़हब का पता नहीं -लेकिन ‘खेल नहीं सिखाता आपस मे बैर रखना’

राजेंद्र सजवान
भारतीय खेलों पर सरसरी नज़र डालें तो जहाँ इस देश ने मेजर ध्यानचन्द , पीटी उषा, सुशील कुमार, बिंद्रा, मिल्खा, बलबीर सिंह, सायना नेहवाल, पीवीसिंधु, पादुकोन, रामनाथन कृष्णन, लीयेंडर पेस जैसे चैम्पियन खिलाड़ी पैदा किए तो सैयद रहींम जैसा महान फुटबाल कोच ,यूसुफ, हबीब जैसे खिलाड़ी, हॉकी मे मोहम्मद शाहिद,इनामउर रहमान,असलम शेर ख़ान; स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा , क्रिकेटर अज़हरुद्दीन और ढेरों अन्य मुस्लिम खिलाड़ियों ने लगभग सभी खेलों मे देश का नाम रोशन किया | भले ही ओलंपिक और एशियाड के पदक विजेताओं मे मुस्लिम खिलाड़ी ज़्यादा नहीं रहे लेकिन जो भी खेले देश के लिए पूरी निष्ठा और जी जान से खेलते रहे हैं और देश की सरकार,ओलंपिक संघ और खेल संघों ने खिलाड़ियों को कभी भी किसी धर्म,जाति या समाज से जोड़ कर नहीं देखा | यही कारण है कि भारतीय टीमें और खिलाड़ी सीमित सुविधाओं और साधनों के बावजूद भी बेहतर परिणाम देने मे सफल रहे |

खिलाड़ी का धर्म सिर्फ़ खेल-शायद खेल ही ऐसा क्षेत्र है जहाँ कभी भी जाति या धर्म के नाम पर चयन या विवाद नहीं हुआ| खिलाड़ी की पहचान हिंदू,मुस्लिम,सिख या ईसाई कभी नहीं रही| कुछ एक मामलों को छोड़ दें तो पूरी दुनिया मे खेल बिरादरी की अपनी एक अलग पहचान रही है | मुकाबला सिर्फ़ मैदान या कोर्ट पर हो सकता है, मुकाबला राज्यों ,देशों या टीमों के बीच हो सकता है पर हिंदू,मुस्लिम,और यहूदियों के खेल मुक़ाबले कभी आयोजित नहीं किए जाते |पाकिस्तान के मुस्लिम खिलाड़ियों को हमारे अपने मुस्लिम खिलाड़ियों ने हमेशा कड़ी टक्कर दी तो गोरों के विरुद्ध अज़हरुद्दीन की कप्तानी मे भारत का प्रदर्शन शानदार रहा | कैफ़ और पठान बंधुओं को भी इस देश ने हमेशा सिर माथे बैठाया |

गंदी राजनीति खेल बिगाड़ सकती है तो फिर क्यों इस देश मे जाति और धर्म की बात की जाती है ? क्यों हिंदू और मुस्लिमों को लेकर बवाल खड़ा किया जा रहा है ? साफ है कि देश की गंदी राजनीति और धर्म के नाम पर राजनीतिक रोटियाँ सेंकने वाले नेता देश को बर्बाद करने पर तुले हैं | डर इस बात का है कि खेलों पर भी गंदी राजनीति की कुदृष्टि ना पड़ जाए| भारतीय खेलों को सतर्क और सावधान रहने की ज़रूरत है |

खेल के सिलेवस मे धर्म की जगह नहीं ऐसा नहीं कि खिलाड़ी कभी लड़ते भिड़ते नहीं या उनके बीच विवाद नहीं होते लेकिन धर्म का बीच मे आने जैसा विवाद कभी नहीं हुआ | तमाम खेलों मे विभिन्न जाति और धर्मों के खिलाड़ी एक कतार मे बैठकर और एक थाली मे खाते -पीते हैं| एक खेल ही ऐसा है जिसके सिलेवस मे धर्म के लिए कोई जगह नहीं है | खिलाड़ी किसी भी धर्म का हो, संघर्ष,कड़ी मेहनत ,टीम भावना और जीत का जज़्बा ही उसका धर्म होता है| निष्कर्ष यह है कि देश के सभी धर्मों के लोग यदि अपने बेटे-बेटियों को खेल से जोड़ें तो बदलाव संभव है |उनकी सोच बदलेगी और सभी देश के लिए अपना श्रेष्ठ देने को प्राथमिकता देंगे | सिर्फ़ खेल ही है जिससे सभी धर्मों को आपस मे प्यार प्रेम और आदर भाव के साथ जोड़ा जा सकता है|

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One comment

  1. Very true reflection of sportsperson. Worldover Sports is the only channel which has no place for religious bias and sportsmen always keeps the religion out of their syllabus.

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