महिला हॉकी:44 साल मे चार कदम पीछे !

महिला हॉकी:44 साल मे चार कदम पीछे !

राजेंद्र सजवान ,
लंदन मे खेले जा रहे विश्व कप मे भारतीय महिला टीम आयरलैंड से हार कर क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ पाई अर्थात अब पाँचवें से आठवें स्थान के लिए खेलना पड़ेगा |यह नतीजा दिल तोड़ने वाला है क्योंकि अपनी लड़कियाँ अपना श्रेष्ठ देने मे नाकाम रहीं| 1974 मेमहिला टीम ने फ्रांस मे खेले विश्व कप मे सेमी फाइनल मे प्रवेश किया और चौथे स्थान पर रही थी और अब चार कदम पीछे कही जा सकती है |

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 1975 मे विश्व कप जीता और इस प्रदर्शन को फिर कभी नहीं दोहरा पाई है|1980 मे मास्को मे आठवाँ ओलंपिक स्वर्ण जीत कर भविष्य की उम्मीद जगाई थी पर यह उपलब्धि भी अब इतिहास ब्न कर रहा गई है | महिला टीम तो कभी भी ओलंपिक और विश्वकप मे पदक नहीं जीत पाई |
इसमे दो राय नहीं कि लड़कियों का प्रदर्शन अच्छा रहा | उनके खेल मे सुधार भी नज़र आया | लेकिन हार तो हार होती है फिर चाहे आप कड़े संघर्ष मे हारें या पेनल्टी शूट आउट मे परास्त हों| जो जीता वह सिकंदर कहलाता है| आयरलैंड से हारकर भारतीय महिला टीम एक पुराने रिकार्ड को दोहराने से चूक गई|

अर्थात भारतीय महिला टीम लाख कोशिशों और साधन सुविधाओं के बावजूद पिछले 44 सालों मे आगे बढ़ने की बजाय पीछे हटी है| यह हाल तब है जबकि पुरुष टीम की तरह महिलाओं पर भी लाखों करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं | उन्हें विदेशी कोच ट्रेनिंग दे रहे हैं| अपने से उपर की रैंकिंग वाली टीमों को हराना मुश्किल हो सकता है पर निचली रैंकिंग की आयरलैंड से लगातार दो बार हारना शोभनीय कदापि नहीं है|

जिन देशों ने भारत से कहीं बाद मे हॉकी को गंभीरता से लिया, उनका खेल सुधर रहा है तो हमारी महिला टीम अच्छा खेलने के बावजूद भी लगातार हार रही है| बेशक, मामला गंभीर है | खेल मंत्रालय,हॉकी इंडिया, विदेशी और अपने कोच और तमाम वह लोग जो टीम से जुड़े हैं कहीं ना कहीं ज़िम्मेदार हैं |

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3 comments

    1. The standard of the game worldover has declined. Indian Hockey despite of pumping in crores of rupees on foreign coaches and support staff has not achieved any significant result at the world level. I feel the induction of foreign coaches have not yielded fruitful results. There is also no accountability of foreign coaches. We should repose faith on Indian coaches.

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  1. कोई भी खेल ,खिलाड़ी, अधिकारी, मैदान, खेलों का सामान जब तक एक पूजा हवन की तरह शुद्ध नहीं होगा तब तक सफलता नहीं मिलेगी आप मेरे इस विचार को किसी भी टीम की पूरी छान बीन कर के एक बार देखे । धन्यवाद्

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