गुरु हनुमान पर बने फिल्म

गुरु हनुमान पर बने फिल्म कोई है जो कुश्ती के महात्मा गाँधी को परदे मे उतार सके ?

नई दिल्ली/ राजेंद्र सजवान,
पिछले कुछ सालों मे बालीवुड भारतीय खिलाड़ियों और कोचों पर खास मेहरबान रहा है | अनेक खिलाड़ियों के खेल जीवन पर फिल्में बनी हैं और यह भी सच है कि उनसे कहीं बेहतर खिलाड़ियों, कोचों और गुरु ख़लीफाओं को नज़रअंदाज किया गया है | नज़र अपनी अपनी है | वैसे भी फिल्में प्राय: उन्हीं पर बनाई गईं जोकि हल्की फुल्की कामयाबी अर्जित कर पाए ,विवादास्पद रहे या जिन खिलाड़ियों और उनके परिजनों ने उनके जीवन चक्र को बढ़ा चढ़ा कर पेश करने और झूठ का सहरा लेने की इजाज़त दी | लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि भारतीय कुश्ती के भीष्मपितामह,गुरुद्रोणाचार्य जैसा व्यक्तित्व रखने वाले और देश को सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय पहलवान और कोच देने वाले पद्‌मश्री गुरु हनुमान पर किसी फिल्म निर्माता,निर्देशक या फिल्म कंपनी की नज़र क्यों नहीं पड़ी ?

अक्सर उनपर फिल्में बनीं जिन्होने देश के लिए कोई बड़ा पदक नहीं जीता या जिन्होने अपने संबंधों और पहुँच का फ़ायदा उठाया| वास्तविकता को तोड़-मरोड़ कर और सिर्फ़ पैसा कमाने की नीयत से बनाई गई कुछ फ़िल्मे पिट गईं तो कुछ एक ने रिकार्ड तोड़ कमाई की| भले ही झूठ और आडंबर से ही सही, पदकों के अकाल से जूझ रहे देश को ऐसी फिल्मों ने खेलों का महत्व भी समझाया| लेकिन गुरु हनुमान को कैसे भुला दिया गया ? आजीवन ब्रहंचारी रहे इस कुश्ती गुरु ने भारतीय कुश्ती को हज़ारों राष्ट्रीय स्तर के पहलवान,सैकड़ों राष्ट्रीय चैम्पियन और अंतरराष्ट्रीयपहलवान और कई ओलंपियन दिए |रोशनआरा रोड स्थित बिड़लाव्यायामशाला से निकलकर
सुदेश,प्रेमनाथ,सतपाल,करतार,रामस्वरूप,ज्ञान,सज्जन,वेदप्रकाश,राजिंदर,सतबीर, जगमिंदर और बाद के सालों मे सुभाष,सुजीत मान,राजीव तोमर और दर्जनों अन्य नामी पहलवानों ने देश का प्रतिनिधित्व किया| कई ऐसे मौकेभी आए जबकि ओलंपिक खेलों मे पूरी भारतीय टीम गुरु हनुमान अखाड़े से रही|
गुरु हनुमान अखाड़े की कामयाबी की कहानी यहीं तक सिमट कर नहीं रह जाती |उनके काबिल शिष्यों राजसिंह,सतपाल,करतार,जगमिंदर,महासिंह राव आदि ने ऐसे शिष्य तैयार किए जिन्होने ओलंपिक और विश्व स्तर पर पदक जीते | सुशील और योगेश्वर ने सतपाल के शिष्यों के रूप मे ओलंपिक पदक जीते और गुरु हनुमान की आत्मा को शांति प्रदान की |गुरु हनुमान पर इसलिए भी फिल्म बननी चाहिए क्योंकि एक अनाथ बालक ने कड़े संघर्ष से भारतीय कुश्ती को सजाया सँवारा| एक फक्कड़,साधु संत का जीवन जीया, धोती-कुर्ते मे सिमट कर रहे और कुश्ती की सेवा करते हुए 99 साल की उम्र मे एक दुर्घटना मे देह त्याग किया |उनके चाहने वालों मे भारत के बड़े नेता , राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,मंत्री,विदेशी नेता और पत्रकारों की भरमार रही | महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्र शेखर आज़ाद और घनश्याम दास बिड़ला उनके परम मित्र और प्रशंसक थे |महात्मा गाँधी की तरह हमेशा लाठी उनके हाथ मे रही,जोकि पहलवानों को पीटने और बेईमान अधिकारियों को कूटने के काम आती थी|

यदि कोई दरियादिल फिल्म निर्माता गुरुहनुमान पर फिल्म बनाता है तो उसे एक चरित्र मे ही एक्शन,ड्रामा,कड़ा संघर्ष,त्याग,समर्पण,जिंदादिली और समाज के लिए अब तक का सबसे खास संदेश मिल जाएगा |कोई है जो साहस दिखा कर असली हीरो के जीवन को पर्दे मे उतार सके?

Advertisements

One comment

  1. Your article fully deserves appreciation and support from sports loving persons. Now, bollywood, which is only after money, needs to give a serious thought to your idea provided pressurised by politicians and Indian media. As everyone knows, sports associations, media and bollywood are under
    the claws of politicians and big business houses.

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.