विदेशीकोचों का रोंदू राग क्यों ?

विदेशीकोचों का रोंदू राग क्यों ?

राजेंद्र सजवान,
जैसे जैसे जकार्ता एशियाड नज़दीक आ रहा है,खिलाड़ियों,कोचों और खेल संघों द्वारा मनगढ़न्त आरोप प्रत्यारोपों का सिलसिला तेज हो गया है|हालाँकि खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा समुचित सुविधाएँ देने का दावा किया गया है फिर भी कुछ पहलवान और कुश्ती के ख़ैरख़्वाह नतीजों को भाँपकर अभी से बहानेबाज़ी करने लगे हैं | कोई कह रहा है कि फेडरेशन ने विदेशी कोचों की समय पर नियुक्ति नहीं की तो कुछ एक अपने व्यक्तिगत कोचों को लेकर संतुष्ट भी हैं |

जहाँ तक कुश्ती फेडरेशन की बात है तो उसने लगातार बेहतर प्रयास किए और पहलवानों को उनकी माँग के अनुसार ट्रेनिंग के अवसर उपलब्ध कराए गये| लेकिन जब सुशील,बजरंग,साक्षी,विनेश,पूजा,दिव्या आदि पहलवानों को अपने व्यक्तिगत कोच बेहतर लगते हैं और उन्हें ट्रेनिंग की आज़ादी दी जाती है तो बहानेबाज़ी के लिए कोई गुंजाइश नहीं बच जाती| फेडरेशन अध्यक्ष ब्रज भूषण शरण सिंह कहते हैं कि उन्होने कभी भी किसी पहलवान की जायज़ माँग को नहीं ठुकराया| सच्चाई तो यह है कि दबाव मे पड़कर कुछ पहलवानों कि नाजायज़ माँगे भी मानी जाती रही हैं |

देखा जाए तो भारतीय कुश्ती कोचों ने अन्य के मुक़ाबले हमेशा बेहतर परिणाम दिए हैं| फिर चाहे कोच गुरु हनुमान रहे हों या मास्टर चंदगीराम,कैप्टन चाँदरूप,राज सिंह,सतपाल,यशवीर,रामफल आदि सभी ने भारतीय कुश्ती मे बड़ा योगदान दिया है | अगली पीढ़ी के गुरुओं मे राष्ट्रीय चीफ़ कोच जगमिंदर,कुलदीप मलिक ग्रीको रोमन कोच कुलदीप सिंह और बजरंग पूनिया के कोच योगेश्वर दत्त की क़ाबलियत को आईना दिखाने की ज़रूरत नहीं है| फ़ेडेरेशन की दरियादिली और इन सभी कोचों के समर्पण और मेहनत से भारतीय कुश्ती आगे बढ़ी है और जकार्ता मे बजरंग,विनेश,पूजा,दिव्या सुमित आदि को पदक का दावेदार माना जा रहा है तो इसलिए क्योंकि उन्हें अपने कोाचों ने बनाया है |हाँ, यदि ग्रीकोरोमन पहलवान विदेशी कोच की बात करते हैं तो उनकी माँग जायज़ है | ग्रीकोरोमन पहलवान हमेशा से उपेक्षित रहे हैं | इस ओर ध्यान देने की ज़रूरत है क्योंकि उनके लिए हमेशा से स्तरीय कोाचों का अकाल रहा है |

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.