बहानेबाज कहीं के !

बहानेबाज कहीं के !

राजेंद्र सजवान,
देश की सर्वकालीन श्रेष्ठ एथलीट पीटीउषा की शिष्या और 800 मीटर की राष्ट्रीय रिकार्ड होल्डर टिंटू लूका जकार्ता एशियाई खेलों से हट गई हैं | उषा ने बाक़ायदा एक पत्र लिख कर कहा है कि टिंटू चोटिल है और एशियाड तक फिट नहीं हो पाएगी| उसका नाम फेडरेशन और आईओए द्वारा संभावित खिलाड़ियों की सूची मे भेज दिया गया था और उसे 15 अगस्त को निर्णायक फिटनेस टेस्ट से गुज़रना था| जाहिर है भारतीय पदक उम्मीदों को झटका लगा है | पिछले एशियाड मे उसने सिल्वर जीता था | अब टेनिस स्टार लिएंडर पेस ने भी पसंदीदा जोड़ीदार नहीं मिलने पर नाम वापस ले लिया है |

टिंटू से काफ़ी समय पहले ओलंपिक पदक विजेता और देश की जानी मानी मुक्केबाज़ मेरीकाम ने एशियाड से इसलिए नाम वापस लिया क्योंकि वह विश्व चैंपियनशिप मे एक बार फिर गोल्ड जीतना चाहती है| डिस्कस थ्रोवर विकास गौड़ा का नाम ऐसे खिलाड़ियों की सूची मे नहीं किंतु वह भी अमेरिका मे तैयारी करते रहे लेकिन भारत सरकार द्वरा किए गये भारी भरकम खर्च के बदले देश को बड़ा सम्मान नहीं दिला पाए| इसी प्रकार चोट के कारण दो बार केओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार पिछले दो एशियाई खेलों मे भाग नहीं ले पाए| कुश्ती प्रेमियों के लिए खुश खबरी है कि सुशील पूरी तरह फिट हैं और इस बार एशियाई खेलों का गोल्ड जीतने जा रहे हैं जोकि अब तक संभव नहीं हो पाया था |

कहने का तात्पर्य यह है कि बड़े नाम वाले खिलाड़ियों पर सरकार द्वारा लाखों -करोड़ों खर्च किए जाते हैं पर ठीक मुक़ाबले से पहले जब उनकी चोट उभर कर आती है या कोई बहाना बनाते हैं तो उनके चाहने वालों को भी गहरी चोट पहुँचती है|लेकिन खिलाड़ी और चोट एक दूसरे से जुड़े हैं| आजीवन फिट रहने वाला और कभी चोट ना खाने वाला खिलाड़ी शायद खोजे नहीं मिल पाएगा |लेकिन ऐसे खिलाड़ियों के बारे मे क्या कहें जोकि ड्रॉ को देख कर या सामने वाले के दमखम को भाँप कर भाग लेने या मुक़ाबले से हटने का फ़ैसला करते हैं| वह भूल जाते हैं कि उनके प्रदर्शन पर करोड़ों देशवासियों की निगाहें लगी हैं और उन्हीं के खून पसीने की कमाई खिलाड़ियों की टेनिंग पर खर्च की जाती है |

हार से कतराने वाले या चोट को छिपाने वाले खिलाड़ी कतई माफी के काबिल नहीं हैं | यह ना भूलें कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा कर और एशियाड और ओलंपिक से नाम वापस लेकर उनकी लोकप्रियता पर प्रतिकूल असर पड़ता है | लेकिन ऐसे खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जोकि सरासर ग़लत है|

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