लो हम खेल महाशक्ति बन गये !

लो हम खेल महाशक्ति बन गये !

राजेंद्र सजवान,
जो लोग जकार्ता एशियाड मे भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बढ़ा चढ़ा कर दिखा रहे हैं और सिल्वर और ब्रांज मेडल के साथ ‘जीत” जैसे शब्द का संबोधन कर रहे हैं ,उनसे भारतीय खेल प्राधिकरण के एक पूर्व चिकित्सक,खेल एक्सपर्ट और खेलों की गहरी समझ रखने वाले डाक्टर चंद्रन और उनके जैसे हज़ारों -लाखों खेल प्रेमी, सरकार और उसके मीडिया से नाखुश हैं|डेढ़ करोड़ की आबादी वाले देश का पदक तालिका मे पहले पाँच देशों मे भी स्थान नहीं पाना बताता है कि भारतीय खेल सही दिशा मे नहीं बढ़ रहे|

भला हो एथलेटिक और निशानेबाज़ी का, जिनके दम पर देश की सरकार ,भारतीय ओलंपिक संघ और खेल संघ अपनी खामियों को छिपा कर ना सिर्फ़ झूठ बोल रहे हैं अपितु देशवासियों के खून पैसे की कमाई खेलों पर लुटाने वालों की पीठ भी थपथपा रहे हैं | इस गोरखधंधे मे मीडिया भी बराबर का भागीदार बना हुआ है | जकार्ता एशियाड के नतीजे उन अवसरवादियों के मुँह पर जोरदार तमाचा हैं जोकि चीन को पछाड़ कर महाशक्ति बनने का ख्वाब देख रहे हैं |चीन का हमसे दस गुना ज़्यादा पदक जीतना और पिछले 67 सालों से हमारा 15 स्वर्ण पदकों की लक्ष्मण रेखा को नहीं लान्ध पाना बताता है कि हम किस कदर फिसड्डी राष्ट्र बनते जा रहे हैं |

बेशक, कुछ खिलाड़ियों ने देश का सम्मान बढ़ाया है,जिनमे तमाम पदक विजेता एथलीट शामिल हैं| भले ही दुति चन्द सोने का तमगा नहीं जीत पाई लेकिन उसके दो सिल्वर मेडल सोने से भी बड़े और भारी कहे जा सकते हैं|लेकिन हॉकी और कबड्डी टीमों के बारे मे क्या कहा जाए जिन्होने ओलंपिक तैयारी के दो साल गवाँ दिए !अब दोनों टीमों को ओलंपिक क्वालीफायर की तैयारी करनी पड़ेगी |घमंड और उँची उड़ाना हॉकी और कबड्डी को भारी पड़े हैं| कोई गारंटी नहीं कि दोनों या कोई एकहॉकी टीम ओलंपिक से बाहर ही रह जाएँ| कबड्डी ने जबसे पेशेवर केंचुली ओढी. है, खिलाड़ियों को करोड़ों दिए जाने लगे हैं तबसे पतन का दौर भी शुरू हो गया| सही मायने मे हॉकी और कबड्डी के पदक गणना के लायक नहीं हैं|

सीधा सा मतलब है कि जो लोग भारत के शर्मनाक प्रदर्शन पर इतरा रहे हैं उनकी नीयत मे खोट है| उन्हें अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का सड़ा गला सामान मिल गया है| हैरानी वाली बात देखिए कि आम जनमानस भी उनके झाँसे मे आ गया है|

डीडी स्पोर्ट्स की अनदेखी क्यों?
जकार्ता एशियाड के चलते डीडी स्पोर्ट्स मातमक्यों मना रहा था ?इस सवाल का जवाब शायद ही कोई दे पाए| खेलो इंडिया स्टार की गोद मे खेलता कूदता रहा और डीडी मूक दर्शक बना रहा| एशियाड का मज़ा सोनी-ईएसपीएन ने लूटा| तो फिर इस बुधू बक्से की ज़रूरत क्या है, क्यों देशवासियों को बेवकूफ़ बनाया जा रहा है ?आख़िर सरकारी मशीनरी की अनदेखी किसलिए? कौन है असली गुनहगार?

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