हवाई अड्डे पर देखी बेटे की शक्ल –मंजीत

Manjeet
हवाई अड्डे पर देखी बेटे की शक्ल –मंजीत

 

नई दिल्ली /राजेंद्र सजवान,
     जकार्ता एशियाड मे 800 मीटर का स्वर्ण पदक जीतने वाले हरियाणा के मंजीत सिंह चहल भले ही मीडिया की पहली पसंद नहीं  रहे लेकिन  हरियाणा का यह लड़ाकू एथलीट 36 साल बाद इस स्पर्धा मे सोना जीत कर चर्चा मे आ गया है| उसने अपने साथी और बेहतर आँके जा रहे जिनसन जानसन को  परास्त कर अभूतपूर्व कारनामा कर दिखाया | उस समय जबकि जानसन और तीन अन्य एथलीट पदक की दौड़ मे सबसे आगे बढ़ चले थे,मंजीत ने रफ़्तार पकड़ी और सभी को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान अर्जित किया| खुद उनके साथी जानसन भी मंजीत के प्रदर्शन से हैरान रह गये|
      आज यहाँ एक साक्षात्कार मेमंजीत ने अपनी कामयाबी के लिए कठिन मेहनत को कारण बताया और कहा कि पिछले कुछसालों मे वह लगभग गुमनामी मे जी रहा था| उसने एशियाडकी तैयारी उटी और भूटान मे की और अंतत: जकार्ता मे जीत के साथ अपनी पहचान को उँचाइयाँ दी| वह इस बीच अपने साढ़ेचार माह के बेटेअभीरचहल को भी नहीं देख पाया था | जकार्ता से वापसी पर दिल्ली हवाई अड्डे पर उसने पहली बार अपने बेटे की शक्ल देखी| वह अपने 1.46 सेकंड के समय मे सुधार कर ओलंपिक पदक जीतना चाहता है| एक सवाल के जवाब मे उसने माना कि आगे की डगर आसान नहीं पर ताज़ा प्रदर्शन ने उसकी हिम्मत बढ़ाई है| 1982 मे भारत के लिए चार्ल्स बोरोमियो ने 800मीटर का स्वर्ण पदक जीता था|अब मंजीत और जानसन मे होड़ लगी है|
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