चीनी बुलावा या ड्रैगन की धमकी?

चीनी बुलावा या ड्रैगन की धमकी?

राजेंद्र सजवान,
“.. अब चीन मे मिलेंगे”,इस वादे के साथ 18वें एशियाई खेलों का समापन हुआ| दुनिया भर के खिलाड़ियों ने 2022मे एक बार फिर चार साल बाद मिलने का वादा किया| लेकिन चीनी नज़रिए से देखें तो फिर से मिलने का संबोधन या आमंत्रण कुछ कुछ धमकी जैसा लगता है| बेशक,यह धमकाने जैसा संबोधन हैक्योंकि ड्रैगन के घर पर जाकर उसको ललकारना और मुकाबला करना आसान कदापि नहीं है|

जिसने घर से बाहर 132 स्वर्ण सहित कुल289 पदक जीत लिए अपनी मेजबानी मे उसका इरादा कम से कम 200 स्वर्ण और कुल 400 पदकों का ज़रूर रहेगा| यह तय है कि अपनी मेजबानी मे चीन किसी को भी मौका नहीं देने वाला| हो सकता है कि परंपरागत प्रतिद्वंद्वी जापान और कोरिया उसे कुछ टक्कर देपाएँ लेकिन बाकी देशों का ग्राफ बुरी तरफ गिरना तय है,जिनमे भारत को भी शामिल मान सकते हैं| 67 सालों मे 15 स्वर्ण पदकों की चुनौती को बराबर करने वाले भारत के लिए चीन मे खेलना इसलिए भी मुश्किल हो सकता है,क्‍योंकि वह हमारा कट्टर विरोधी है |हो सकता है भारतीय खिलाड़ियों को इंडोनेशिया जैसा समर्थन भी ना मिले| ज़ाहिर है हमें आज और अभी से तैयारी करनी है| चीनी मीडिया की माने तो उनके देश ने मेजबानी मिलने के साथ ही तैयारी शुरू कर दी थी|

वाकई, बड़ा गजब का देश है| किसी भी एशियाड और ओलंपिक से पदकों का जखीरा लूट ले जाता है| यही कारण है कि अमेरिका भी उससे डरता है|ओलंपिक मे दोनों महाशक्तियों के बीच पदकों का असली खेल खेला जाता है|देखा जाए तो चीन और भारत के बीच फिलहाल खेल मैदान पर कोई मुकाबला नहीं है| उसके पास खिलाड़ियों की कतारें लगी हैं| मात्र 14-15 साल के तैराक,डाइवर और जिमनास्ट एशियाड और ओलंपिक मे चैम्पियन बन रहे हैं|बड़ा फ़र्क यही है कि इस उम्र मे हमारे खिलाड़ी पहला पाठ भी नहीं पढ़ पाते| किसी खेल और स्पर्धा के चैम्पियन खिलाड़ी का स्थान झपटने के लिए कई प्रतिभाएँ कतार मे खड़ी हैं| ऐसा ताम झाम अन्य किसी देश के पास नहीं है|

तो फिर एशियाई देश चीन की मेहमानवाज़ी का लुत्फ़ उठाने और उसकी फब्ती वाली धमकी का जवाब देने के लिए अभी से कमर कस लें| वरना बहुत देर हो सकती है|

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