कबड्डी का कबाड़ा

कबड्डी का कबाड़ा !

राजेंद्र सजवान,
जिसका डर था वही हुआ और कबड्डी का शक्ति परीक्षण टांय टांय फिस्स होकर रह गया| दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों परराजधानी के इंदिरा गाँधी स्टेडियम मे आयोजित किया जानेवाला एशियाई पदक विजेता और शेष भारत के बीच घोषित मैच संभव नहीं हो पाया|कबड्डी फेडरेशन के प्रतिद्वंद्वी धड़े ने जकार्ता एशियाई खेलों के लिए चुनी गई पुरुष एवम् महिला टीमों के चयन मे धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे और कोर्ट ने कांस्य पदक विजेता पुरुष टीम और रजत विजेता महिला टीम को शेष खिलाड़ियों की चुनी गई टीम के साथ मैच खेलने का फरमान जारी कर दिया| लेकिन दोनों ही राष्ट्रीय टीमें खेलने नहीं आईं| सूत्रो से पता चला है कि प्रमुख खिलाड़ी गुड़गाँव मे शूटिंग मे व्यस्त थे|

हैरानी वाली बात यह है कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद एशियाड मे खेलने गये खिलाड़ी मुक़ाबले के लिए नहीं पहुँचे|जकार्ता एशियाड मे खेली टीमों को चुनौती देने देशभर के लगभग 80 खिलाड़ी पहुँचे और आपस मे खेले|प्रयवेक्षक की हैसियत से न्याधीश एसपीगर्ग मैच स्थल पर मौजूद थे|उन्होने विपक्षी धड़े के खिलाड़ियों के बीच खेले गये दोस्ताना मैचों का लुत्फ़ उठाया पर मीडिया के बार बार पूछे जाने के बावजूद सिर्फ़ यही कहा कि वह मैच देखने आए थे और मैच देख रहे हैं | जब उनसे पूछा गया कि वह क्या एक्शन लेने जा रहे हैं तो उन्होने इतना ही बताया कि अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेंगे|

कुल मिलाकर कबड्डी मैच महज तमाशा बन कर रह गया| लेकिन इस तमाशे के बीच असल बात यह निकल कर आई कि सारे फ़साद की जड़ मे कबड्डी फेडरेशनऔर हाल मे घोषित न्यू कबड्डी फेडरेशन की तनातनी है| एक गुट कई वर्षों से प्रो. कबड्डी लीग का आयोजन कर रहा है तो दूसरे धड़े ने अपनी अलग लीग आयोजित करने का फ़ैसला किया है|उनकी इस गुटबाजी के चलते कबड्डी का जमकर कबाड़ा हुआ|

जाहिर है,लगातार सात एशियाड खिताब जीतने के बाद ईरान के हाथों परास्त हुई भारतीय कबड्डी की मुश्किलें कम होती नज़र नहीं आ रही हैं| कोरिया और ईरान के दिए ज़ख़्मों पर मरहम लगाने की बजाय कबड्डी के खैरख़्वाह एक दूसरे पर कीचड़ उछालने मे कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं| जकार्ता के खराब प्रदर्शन की सच्चाई जाँचने और टीम के चयन मे हुई गड़बड़ी की जाँच पड़ताल के टीम इंडिया और शेष खिलाड़ियों की टीम का मुकाबला कराया जाना अपने आप मे अनोखा प्रयोगहै| भारतीय खेलों मे आज तक ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता|लेकिन ऐसे आयोजन की संभावना कदापि नहीं थी और वही हुआ भी|भाग लेने आए खिलाड़ियों और अधिकारियों ने फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष जनार्दन गहलोत पर गंभीर आरोप लगाए और यहाँ तक कहा कि गहलोत वर्षों से जंगल राज चला रहे थे और पद से हटाए जाने के बाद भी सब कुछ उनके इशारे पर तय होता है| असंतुष्टों के अनुसार सिर्फ़ उन्हीं खिलाड़ियों का राष्ट्रीय टीम मे चयन किया जाता है जो उनसे सौदेबाज़ी करने मे सफल रहते हैं|

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