ऐसे तो.टे. टेनिस का भला नहीं होगा

ऐसे तो.टे. टेनिस का भला नहीं होगा

राजेंद्र सजवान
रियो ओलंपिक मे चौथा स्थान अर्जित करने वाली दीपा करमारकर के कोच नंदी सिंह को आनन फानन मे ही द्रोणाचार्य बना दिया गया,हालाँकि दीपा ने रियो ओलंपिक मे कोई बड़ा तीर नहीं चलाया था| लेकिन मीडिया के एक वर्ग ने उसे इतना उछाला कि चौथा स्थान अर्जित करने वाली जिमनास्‍ट को सातवें आसमान पर बैठा दिया गया|सच्चाई यह है कि देश के दर्ज़न भर एथलीट,मुक्केबाज़और पहलवान ओलंपिक मे चौथा स्थान पा चुके हैं पर उनकी किसे ने खबर नहीं ली| खेल अवार्डों की बंदरबाँट का दूसरा पहलू बेहद दुखद है | टेबल टेनिस मे देश का नाम रोशन करने वाली और कामनवेल्थ और एशियाड मे कुल पाँच पदक जीतने वाली मणिका बत्रा के कोच संदीप गुप्ता का नाम द्रोणाचार्य अवॉर्ड पाने वालों की सूची मे नहीं है |

ऐसा क्यों ? वर्ष2018 के लिए घोषित द्रोणाचार्यों मे ज़्यादातर ऐसे नाम शामिल हैं जिनके बारे मे खेल प्रेमियों ने ज़्यादा कुछ नहीं सुना | उनमे से अधिकांश ऐसे हैं जिनकी उपलब्धियों को सराहने वाले खोजे नहीं मिल पाएँगे| ख़ासकर,वर्तमान खिलाड़ियों मे से इन महानुभाओं के शिष्य खोजना दूर की कौड़ी कही जा सकती है| सवाल यह पैदा होता है कि खेल मंत्रालय ने यदि खेल अवॉर्ड उसी घिसे पिटे ढर्रे पर बाँटने थे तो 29 अगस्त को ही क्यों नहीं बाँटे गये| आख़िर खेल दिवस की अवहेलना से क्या मिला ?
क्यों दद्दा ध्यानचन्द की आत्मा को कष्ट पहुँचा गया?
एक तरफ तो कहा जा रहा है कि मणिका और उसके कोच ने भारतीय टेबल टेनिस को नई पहचान दी है और और अब भारत इस खेल मे अन्य चैम्पियनों को कड़ी टक्कर देने लगा है | खेल जानकारों की राय मे यदि मणिका के कोच को द्रोणाचार्य दिया जाता तो एक उभरते खेल को बढ़ावा मिलता और मणिका का मनोबल उँचा होता जोकि टोक्यो ओलंपिक मे पदक जीतने की दावेदार मानी जा रही है|

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