बजरंग की अनदेखी क्यों?

बजरंग की अनदेखी क्यों?

राजेंद्र सजवान ,
पिछले कुछ सालों मे भारतीय पदक तालिका का सम्मान बढ़ाने मे यदि किसी खेल का सबसे बड़ा हाथ रहा है तो वह निसंदेह कुश्ती है |फिर चाहे सुशील,योगेश्वर और साक्षी के ओलंपिक पदक हों या कामनवेल्थ और एशियाई खेलों मे बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट की स्वर्णिम सफलता | लेकिन देश के खिलाड़ियों और गुरुओं को सम्मान देने के लिए गठित अवॉर्ड कमेटियों को इस बात का ज़रा भी अहसास नहीं रहा| इस बार के घोषित द्रोणाचार्य और खेल रत्न अवार्डों मे कुश्ती से जुड़ी एक भी शख्सियत शामिल नहीं है |

कुश्ती प्रेमी मान रहे थे कि बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट को इस बार खेल रत्न मिलना तय था| उनकी अनदेखी से कुश्ती प्रेमी बेहद निराश और नाराज़ हैं|ख़ासकर,बजरंग ने लगातार अपने खेल और उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया है|कुश्ती जानकारों और गुरु ख़लीफाओं की माने तो कामनवेल्थ और एशियाई खेलों मे बजरंग का रिकार्ड किसी भी भारतीय पहलवान से बढ़ चढ़ कर रहा है|2014 मे उसने दोनों खेलों मे सिल्वर जीतने के बाद 2018 मे गोल्ड जीते| विश्व और एशियन चैंपियनशिप के पदक भी उसके नाम हैं|उसकी उपेक्षा से गुरु और बड़ेभाई समान योगेश्वर दत्त भी निराश हैं|कुश्ती जगत बजरंग की अनदेखी को गंभीरता से ले रहा है और उसकी उपेक्षा को चुपचाप सहने के मूड मे कदापि नहीं है|मामला राजनीतिक हो जाए तो हैरानी नहीं होगी|

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जकार्ता मे जय बजरंग !

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