वरना कोर्ट जाऊँगा–बजरंग

वरना कोर्ट जाऊँगा–बजरंग

राजेंद्र सजवान,
देश के श्रेष्ठ पहलवान बजरंग पूनिया राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड पाने वालों की सूची मे अपना नाम ना पाकर बेहद आहत हैं और खेल मंत्री से मिल कर अपना दुखड़ा सुनाना चाहते हैं | यदि बात नहीं बनी तो कोर्ट की शरण मे जा सकते हैं| आज यहाँ अपनी पीड़ा सुनाते हुए बजरंग ने कहा कि वह हर प्रकार से खेल रत्न पाने का हकदार है| नंबरों के खेल मे भी उसकी टक्कर का कोई नहीं है तो फिर उपेक्षा क्यों हुई ?

जिस दिन राष्ट्रीय खेल अवार्डों के आबंटन की तिथि 29 अगस्त से 25 सितंबर किए जाने की घोषणा हुई थी तब लगा जैसे खेल मंत्रालय कुछ नया करने जा रहा है| लेकिन खेल अवार्ड पाने वालों के नाम घोषित किए जाने के बाद देश के जाने माने खेल पंडितों और खिलाड़ियों ने तौबा कर ली| उम्मीद की जा रही थी कि चयन समिति कामनवेल्थ खेलों और एशियाई खेलों मे शानदार प्रदर्शन करने वालों मेसे एक-दो को देश के सबसे बड़े अवॉर्ड ‘राजीव गाँधी खेल रत्न’ से सम्मानित करेगी| लेकिन ऐसा नहीं किया गया| खेल रत्न क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और विश्व चैंपियनशिप मे स्वर्ण जीतने वाली वेटलिफ्टर मीरा बाई चानू को दिए जाने की घोषणा से हर कोई सन्न रह गया|

सबसे बड़ी हैरानी वाली बात यह है कि देश के सबसे लोकप्रिय खेल और ओलंपिक एवम् एशियाड मे तिरंगे का गौरव बढ़ाने वाली कुश्ती को बदरंग कर दिया गया|खेल हलकों मे यह चर्चा थी कि देशके लिए बड़े से बड़ा खिताब जीतने वाले और ओलंपिक पदक के प्रबल दावेदार बजरंग पूनिया को खेल रत्न और उनके गुरु एवम् ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त को द्रोणाचार्य मिलना तय है| हैरानी वाली बात यह है कि खेल मंत्रालय और तमाम ज़िम्मेदार लोग इस मुद्दे पर मौन हैं और कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है| अतः मजबूरन बजरंग को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है|इस अभियान मे कुश्ती बिरादरी और देश के तमाम जागरूक खिलाड़ियों ने योगी-बजरंग का साथ देने का वादा किया है|

सवाल यह भी पैदा होता है कि जब क्रिकेट खेल मंत्रालय की नहीं सुनता और तमाम खेलों की विश्व चैंपियनशिप का सच हर कोई जानता है तो बजरंग को पहली पसंद क्यों नहीं बनाया गया?कामनवेल्थ और एशियाड के दो स्वर्ण और इतने ही रजत उसके खाते मे हैं एशियन और विश्व स्तर पर वह पदक जीत चुका है और ओलंपिक का पदक भी ज़्यादा दूर नहीं है| ऐसे मे उसका मनोबल गिराना समझदारी कदापि नहीं हैं |

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