.तो फिर कैसे खेलेगा उत्तराखंड ?

….तो फिर कैसे खेलेगा उत्तराखंड ?

राजेंद्र सजवान,
‘सर,हमारे बच्चों को दौड़ने के लिए पचास मीटर का मिट्टी का ट्रैक तक नहीं है|खो खो और कबड्डी खेलने के लिए भी जगह नहींतो फिर भला फुटबॉल और क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेलों मे कैसे भाग ले पाएँगे?’,ग्राम खनाना वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा किए गये एक सर्वे से पता चला है कि उत्तराखंड के अधिकांश गाँवों और स्कूलों मे खेलों की बुनियादी सुविधाएँ नहीं हैं| लगभग पचास स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सुविधाओं के अभाव मे प्रदेश की प्रतिभाएँ असमय मुरझा रहीं हैं| जो बच्चे अपने गाँव,ब्लॉक,राज्य और देश का नाम रोशन कर सकते थे उन्हें मन मसोजकर रह जाना पड़ रहा है|सर्वे से पता चला है कि टिहरी गढ़वाल के पट्टी पालकोट और उसके करीबी लगभग पाँच सौ गाँवों के स्कूलों मे खेल के मैदान नहीं हैं|यहीं पर खनाना वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा 15 दिसंबर को मिनी मैराथन का आयोजन किया जाना है|

उल्लेखनीय है कि 2019-20 मे उत्तराखंड राष्ट्रीय खेलों का आयोजन करने जा रहा है|यह हाल सिर्फ़ उत्तराखंड का नहीं है|नॉर्थ ईस्ट को छोड़ देश के बाकी पर्वतीय प्रदेशों की हालत आज़ादी के 70 साल बाद भी बाद से बदतर हुई है| इसमे दो राय नहीं कि नार्थ ईस्ट के राज्यों ने केंद्र पर दबाव बना कर तमाम खेल सुविधाएँ हासिल की हैं पर उत्तराखंड के कुछ शहरों को छोड़ दिया जाए तो खेलने के लिए मैदान,उपकरण, कोच और तमाम बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं| सर्वे से पता चला है कि पाली,रनकोट,खरसाड,मरोड़ा,निगेर,खनाना,फनिक्या,भदनी,लसेर और हज़ारों अन्य गाँवों के छात्रों ने आज तक खेल मैदान की शक्ल तक नहीं देखी| चूँकि सरकारों के खेल विभाग सुस्त पड़े हैं और कुछ खास शहरों और गाँवों पर उनकी कृपा दृष्टि रहती है इसलिए उत्तराखंड के छात्र-छात्राएँ उभर कर नहीं आ रहे| यह दोगलापन पलायन का बड़ा कारण भी माना जा रहा है|

उत्तराखंड को बचेंद्री पाल,जसपाल राणा,जयदेवबिष्ट,दर्जनों फुटबॉल खिलाड़ियों पर गर्व हो सकता है परंतु इनमे से ज़्यादातर ने प्रदेश से बाहर निकलकर नाम सम्मान कमाया| लेकिन टिहरी,पौड़ी,उत्तरकाशी,अल्मोड़ा,पिथोरागढ़,चमोली आदि जिलों की प्रतिभाओं की सुध कौन लेगा?वक्त आ गया है कि देश का खेल मंत्रालय,भारतीय खेल प्राधिकरण,खेल संघ और तमाम ज़िम्मेदार इकाइयाँ बिलों से निकल बाहर आएँ और पहाड़ की असली प्रतिभाओं की खोज खबर लें| प्रदेश के लिए राष्ट्रीय खेलों का आयोजन ना सिर्फ़ उपलब्धि है अपितु चुनौती भी है| बेहतर होगा प्रतिभाओं की खोज का कार्यक्र्म आज और अभी शुरू कर दिया जाए| एथलेटिक,फुटबॉल,कबड्डी,मुक्केबाज़ी,निशानेबाज़ी,पर्वतारोहन,जूडो आदि खेलों मे यह प्रदेश देश को कई चैम्पियन देने मे सक्षम है|

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