भारतीय टेनिस: सिर्फ दिखावा और छलावा

राजेंद्र सजवान
वर्ष 2019 के पहले ग्रांड स्लैम टूर्नामेंट के लिए मेलबोर्न तैयार है| दुनिया के 101टाप पुरुष और 102 महिला खिलाड़ी आस्ट्रेलियन ओपन की शक्ति परीक्षा मे उतर रहे हैं जिनमे भारत का एक भी खिलाड़ी शामिल नहीं होगा| कारण, भारतीय खिलाड़ी रैंकिंग के हिसाब से बहुत पीछे चल रहे हैं| 14 से 21जनवरी तक खेले जाने वाले टूर्नामेंट में भारतीय भागीदारी के रूप मे दस बालकिड्स का चयन किया गया है|हो सकता है कोई खिलाड़ी क्वालीफाइंग टूर्नामेंट से मुख्य ड्रॉ मे स्थान बना जाए लेकिन किसी से भी एक दो राउंड टापने की उम्मीद नहीं है|

एक तरफ तो भारत मे टेनिस को लेकर बड़ी बड़ी बातें की जा रही हैं, टेनिस महासंघ और अन्य लोग चैम्पियनों की कतार लगाने का दम भर रहे हैं तो दूसरी तरफ हालात इतने बदतर हैं कि किसी भी ग्रांड स्लैम और अन्य बड़े आयोजनों मे भाग लेने के लिए खिलाड़ी उपलब्ध नहीं हैं| राम नाथन कृष्णन,विजय अमृतराजरमेश कृष्णन, लियान्डर पेस के कद के खिलाड़ी पैदा करनाअब भारतीय टेनिस के बूते की बात नहीं रही| सीधा सा मतलब है कि भारत मे अच्छे प्रशासक,कोच और खिलाड़ी नहीं हैं| जो कुछ दिखाई देता है,महज धोखा और छलावा है|

हैरानी वाली बात यह है कि टेनिस खेलने वालों की तादात लगातार बढ़ रही है| देश का धनाढ्य वर्ग क्रिकेट के बाद टेनिस की तरफ भाग रहा है पर ग्रांड स्लैम,डेविस कप औरओलंपिक मे खिताब जीतना तो दूर,भाग लेने की योग्यता भी भारतीय खिलाड़ियों मे नज़र नहीं आती|महिला वर्ग मे तो हालत और भी खराब है| सायना मिर्ज़ा ने शुरुआती वर्षों मे चन्द सफलताएँ अर्जित कीं| लेकिन पुरुष खिलाड़ियों की तरह उसने भी डबल्स मे कूदना बेहतर समझा और लियान्डर, महेश और बोपन्ना की तरह कुछ ग्रांड स्लैम जीते| सिंगल्स मे भारत की झोली मे लियान्डर का ओलंपिक कांस्य पड़ा है| डेविस कप जीतना भारतीय खिलाड़ियों के वश की बात नहीं है| लेकिन आपस मे लड़ना-भिड़ना उन्हें खूब आता है|

अर्थात भारतीय टेनिस का भविष्य अंधकारमय है|ले देकर उम्मीद आस्ट्रेलियन ओपन के लिए चुने गये बॉलकिड्स पर टिकी है| क्या पता उनमे से ही कोई बेहतर खिलाड़ी निकल आए!

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One comment

  1. भारत में टेनिस अब भी अमीरों का खेल बना हुआ है। कुछेक टेनिस अकादमियां हैं वे सब्जबाग दिखाकर माता पिता से मोटाा धन वसूल लेती हैं लेकिन वहां का प्रशिक्षण का ढर्रा बहुत पुराना है। कभी मौका लगे तो आंद्रे अगासी की आत्मकथा ‘ओपन’ पढ़ना। उससे पता चलता है कि ट्रेनिंग और समर्पण क्या होता है। हर युवा खिलाड़ी को यह किताब पढनी चाहिए।

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