मिट्टी की कुश्ती से दूर रहे फेडरेशन

मिट्टी की कुश्ती से दूर रहे फेडरेशन

राजेंद्र सजवान,
भारतीय शैली कुश्ती महासंघ को सभी टाइटल कुश्तिया (मिट्टी की कुश्ती)आयोजित करने का हक मिलने के बाद आज यहाँ अध्यक्ष राम आशरे यादव और महासचिव द्रोणाचार्य रोशन लाल ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए भारतीय कुश्ती फेडरेशन (डब्ल्यूएफआई) से गुहार लगाई कि मिट्टी और गद्दे की कुश्ती को अलग -अलग पनपने दें| 21 दिसंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश मे हिंद केसरी टाइटल को मिट्टी की कुश्ती का आयोजन करार दिया और कहा कि 1958 से भारतीय शैली की कुश्ती हिंद केसरी का आयोजन करती आ रही है| विवाद की शुरुआत तब हुई जब फेडरेशन ने 29और 30 दिसंबर को महाराष्ट्रा मे हिंद केसरी के आयोजन की घोषणा की और मिट्टी की कुश्ती वाली संस्था ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन माना|

राम आशरे ने अपनी जीत को मिट्टी की कुश्ती की जीत के साथ जोड़ा और कहा कि सांसद ब्रज भूषण की अध्यक्षता वाली फेडरेशन को अब सिर्फ़ गद्दे की कुश्ती पर ध्यान देना चाहिए| उन्होने कहा की 60 साल पुरानी संस्था ने अब तक 50 हिंद केसरी,भारत केसरी, रुश्तमें हिंद जैसे आयोजन किए हैं और अब कोर्ट ने उनके आयोजनों पर मुहर लगा दी है| अतः बेहतर होगा फेडरेशन ओलंपिक स्टाइल वाली कुश्ती पर ध्यान दे और मिट्टी की कुश्ती को उनकी संस्था से हथियाने का प्रयास ना करे|

इस अवसर पर महासचिव रोशन लाल ने सॉफ तौर पर कहा कि हम फेडरेशन के किसी काम मे दखल नहीं देंगे| उनके पास फ्रीस्टाइल और ग्रीको रोमन जैसे आयोजन हैं जिनमे देश को एशियाड,कामनवेल्थ और ओलंपिक के पदक मिलते हैं| उनके अनुसार देश के सभी बड़े छोटे पहलवान मिट्टी की कुश्ती से निकले हैं | उनकी शुरुआत मिट्टी से होती है और बाद मे गद्दे पर लड़ते हैं| सतपाल,करतार,मास्टर चंदगी राम और यहाँ तक की सुशील और योगेश्वर जैसे पहलवान भी मिट्टी से निकले हैं| ऐसे मे फेडरेशन को मिट्टी की कुश्ती का सम्मान करना चाहिए| एक सवाल के जवाब मे उन्होने कहा कि मिट्टी की कुश्ती के पहले हिंद केसरी राम चंद्र ,सुभाष और संजय तथा कई अन्य ने उन्हें समर्थन दिया है|

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One comment

  1. मिट्टी पर कुश्ती भारत वर्ष की शादियों पुरानी परम्परा रही है । किसी तरह का हस्तक्षेप एक घिनौना कार्य होगा । मैं सभी भारतवासियों से अनुरोध करता हूँ कि मिट्टी पर होने वाली कुश्ती को प्रोत्साहित करें । जय हिन्द । 🙏🙏

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