निशाने पर छेत्री

निशाने पर छेत्री

राजेंद्र सजवान
नया साल भारतीय फुटबॉल के लिए एएफसी कप के रूप मे नयी चुनौती लिए खड़ा है| पिछले कुछ महीनों मे भारत ने फुटबॉल मे जो कुछ कमाया है उसकी परीक्षा की घड़ी आ गई है| लेकिन सबसे बड़ी परीक्षा से कप्तान सुनील छेत्री को गुज़रना है,जोकि 34 साल पूरे करने के बाद भी टीम के लिए त्रुप का पत्ता बने हुए हैं और प्रतिद्वंदियों के पहले निशाने पर हैं|

भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत छह जनवरी को थाईलैंड के विरुढ़ खेल कर करेगी| दस और चौदह जनवरी को क्रमशः यूएई और बहरीन से खेलना है|चौथी बार एएफसी कप खेल रही भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसके पास सुनील छेत्री जैसे भरोसे के खिलाड़ी ज़्यादा नहीं हैं| वह चल गया और गोल जमाने मे सफल रहा तो ठीक वरना जीत के मौके कम हो जाते हैं| उसके अलावा गोलकीपर गुरप्रीत,रक्षक झींगनौर फ़ॉरवर्ड जेजे भरोसे के खिलाड़ी हैं परंतु भारत को यदि आगे जाना है तो सुनील ही ऐसा करिश्मा कर सकता है|

देश के फुटबॉल जानकार और पूर्व खिलाड़ी कह रहे हैं कि भारत के अवसर उसके कप्तान के प्रदर्शन पर निर्भर करते हैं| ऐसे मे उस पर अतिरिक्त दबाव होना स्वाभाविक है| रवानगी के वक्त इस बारे मे जब सुनील से पूछा गया तो उसने टका सा जवाब दिया कि वह किसी प्रकार के दबाव मे नहीं है और उसके जैसे कई खिलाड़ी टीम मे हैं| लेकिन भाग लेने वाली तीनों दिग्गज टीमों को पता चल गया है कि उसके कप्तान को जैसे तैसे नियंत्रण मे रखो,धक्का-मुक्की,जैसे भी हो उसे चलने ना दो तो जीत आसान हो जाएगी| वैसे भी एशिया की श्रेष्ठ टीमों से पार पाना आसान नहीं होगा| एक मैच भी जीत गये तो काफ़ी रहेगा|

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