लाखों बेरोज़गार:खिलाड़ी बन रहे अपराधी

राजेंद्र सजवान,
एक सर्वे से पता चला है कि भारत मे हर साल पाँच से सात लाख खिलाड़ी बेरोज़गार हो रहे हैं| इनमे राज्य और राष्ट्रीय स्तर के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी बड़ी मात्रा मे शामिलहैं| वर्ष 2018 मे राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों मे भाग लेने गये खिलाड़ियों मे से भी कई एक ऐसे हैं जिन्हे भविष्य अंधकारमय नज़र आ रहा है| अनुमान लगाया जा सकता है कि जब राष्ट्रीय कलर पाने वाले खिलाड़ियों की कोई पूछ नहीं तो बाकी के बारे मे कौन सोचेगा! तो फिर खेल प्रोत्साहन का नारा किसलिए?यह भी पता चला है कि बेरोजगार खिलाड़ी अपराध तंत्र की गिरफ्त में हैं।कई पहलवान, बॉडी बिल्डर, पावर लिफ्टर, एथलीट और अन्य खिलाड़ी बेरोजगारी के चलते अपराधी बन रहे हैं।

जहाँ तक खिलाड़ियों को नौकरी देने की बात है तो भारतीय रेलवे,सेना और पुलिस मे कुछ एक को भर्ती किया जाता है| इन भाग्यशाली खिलाड़ियों मे ज़्यादातर ऐसे होते हैं जिन्हें अपने खेल मे देश का प्रतिनिधित्व प्राप्त होता है|लेकिन जो खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर से आगे नहीं बढ़ पाते या जिनका कोई खैर ख्वाह नहीं होता उनका जीवन दूभर हो जाता है|

हर साल स्कूल,कॉलेज पास करने वाले और बीच मे पढ़ाई छोड़ने वाले हज़ारों-लाखों खिलाड़ी दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं|कुछ साल पहले तक बैंकों ,बीमा कंपनियों,सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों मे खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स कोटा तय होता था लेकिन जैसे जैसे देश मे खेलों के प्रति रुझान बढ़ा है और खेलों के प्रति जागरूकता आई है,बेरोज़गार खिलाड़ियों की कतार बढ़ती जा रही है| सीधा सा मतलब है कि खिलाड़ियों मे से कुछ एक सौ को निकाल दिया जाए तो लाखों का भविष्य चौपट हो रहा है|तो फिर ऐसे खेलने का क्या फ़ायदा|

भले ही कुछ क्रिकेटर करोड़ों कमा रहे हैं,ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वालों को लाखों-करोड़ों मिल रहे हैं और पाँच-छह खेलों की प्रो.लीग मे भी पैसा मिल रहा है परंतु बेरोज़गार और बेकार सरकारों को मुँह चिढ़ा रहे हैं| हालाँकि सरकारें खिलाड़ियों को सुरक्षित भविष्य के झूठे वादे कर रही हैं लेकिन सच्चाई यह है कि पाँच फीसदी खिलाड़ी भी सुरक्षित नहीं हैं| तो फिर कोई खेलों को क्यों अपनाना चाहेगा? सर्वे से यह भी पता चला है कि जिस प्रकार देश मे लाखों इंजीनियर बेकार घूम रहे हैं और अपराध की तरफ बढ़ रहे हैं उसी तरह के ट्रैक पर खिलाड़ी भी निकल पड़े हैं|

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One comment

  1. बिल्कुल सही कहा भाई साहब आप ने यह एक गम्भीर समस्या है इसका हल सरकार को निकालना ही चाहिए ।

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