क्रिकेट को टक्कर दे रही कबड्डी

क्रिकेट को टक्कर दे रही कबड्डी

राजेन्द्र सजवान
भारतीय कबड्डी से जुड़े खिलाड़ी जहां एक ओर अपने खेल की प्रगति को अभूतपूर्व बताते हैं और खुद को कबड्डी खिलाड़ी कहलाने पर गर्व की अनुभूति करते हैं तो साथ ही उन्हें ए शियाई खेलों में एकाधिकार समाप्त होने का भी अफसोस है । जकार्ता एशियाड में भारत को कांस्य पदक ही मिल पाया था। इस प्रकार सात बार के विजेता भारत को पहली बार अपयश झेलना पड़ा। आज यहाँ बाल कृष्ना उद्योग द्वारा आयोजित आठ प्रो. कबड्डी लीग की टीमों के कार्यक्रम में देश के चैम्पियन खिलाड़ियों ने अपने अनुभव सांझा किये और माना कि कबड्डी ने उनका जीवन बदल दिया है ।

देश के जाने माने खिलाड़ियों राहुल चौधरी,विशाल माने,प्रदीप नरवाल,मोनू गोयल,विशाल भारद्वाज,सुकेश,सुमित सिंह, अमित आदि ने माना कि ए शियाड में स्वर्ण गंवाने के अफसोस है लेकिन भारत के लिए एक चुनौती भी है ।बीकेडी के संयुक्त प्रबंध निदेशक राजीव पोदार के अनुसार ईरान का खिताब जीतने बताता है कि कबड्डी विश्व स्तर पर पहचान बना रही है। यही कारण है कि बी के डी ने देश की 12 में से आठ टीमों को सहयोग करने का फैसला किया है ।

पटना पाइरेट्स,पुनेरी पलटन,तमिल तलवास,तेलुगु टाइटंस, यू पी योद्धा,बंगलुरु बुल्स,दबंग दिल्ली और हरयाणा स्टीलर्स को बी के डी सहयोग करेगा।
आज यहां छठे संस्करण के विजेता बंगलुरु बुल्स को ट्राफी देकर सम्मानित किया गया। आठों टीमों के स्टार खिलाड़ियों ने माना कि उन्हें देश मे हर कहीं सम्मान मिलता है,उन्हें जाना पहचाना जाता है,
उन्हें ऊंची कीमत मिल रही है और यह सब प्रो. कबड्डी के कारण संभव हो पाया है। उन्हें भरोसा है कि भारतीय कबड्डी अपना खोया सम्मान वापस पाएगी।

एक सवाल केजवाब में श्री पोदार ने कहा कि क्रिकेट देश का सबसे लोकप्रिय खेल है लेकिन कबड्डी की तरह क्रिकेट भी ओलंपिक में शामिल नहीं है।उन्होंने दावा किया कि कबड्डी किसी भी लीग से बेहतर स्थिति में है और क्रिकेट को टक्कर दे रही है।

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