डोप से सावधान: नाडा और पेफ़ी मिलकर लड़ेंगे

राजेंद्र सजवान
भारतीय खिलाड़ियो को डोपिंग के बारे मे एजुकेट करने और डोप के घातक परिणामों से अवगत कराने के लिए नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने कमर कस ली है| नाडा नेअब फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पेफी) से हाथ मिलाया है| दोनों साथ मिलकर दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन दिल्ली के डॉ भीमराव अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर जनपथ पर 30 और 31 जनवरी को करने जा रही है। इस कांफ्रेंस में देश के राज्यों से करीब 1000 खिलाड़ी, प्रशिक्षक, स्कूलों और कालेजों में कार्यरत शारीरिक शिक्षक खेल पत्रकारिता के दिग्गज पत्रकारों सहित, और खेलकूद जुड़े लोग शामिल होंगे।

नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी के महानिदेशक श्री नवीन अग्रवाल ने कॉन्फ्रेंस के ब्रोशर को अनावरण करते हुए कहा कि खेलों में बढ़ती हुई प्रतिबंधित दवाइयों के सेवन के खिलाफ यह सेमिनार खिलाड़ी और प्रशिक्षकों को जागरूक करेगी जाने और अनजाने में खिलाड़ियों के द्वारा प्रतिबंधित दवाइयां लेने से न केवल उनके कैरियर पर प्रभाव पड़ता है साथ ही साथ उनके स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है।

डा. अग्रवाल के अनुसार नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) द्वारा पूरे देश में फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर जागरूकता अभियान का आयोजन किया जा रहा है जिसमें के खिलाड़ियों शारीरिक शिक्षकों और खेल प्रशिक्षकों को प्रतिबंधित दवाइयों और उनके सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

पेफी के सचिव डॉ पीयूष जैन ने कहा कि जबसे खेल जगत में प्रतिस्पर्घा बढ़ी और पदक जीतने पर लाखों-करोड़ों के इनाम दिए जाने लगे हैं खिलाड़ी डोपिंग के जरिए अपना शारीरिक दमखम बढ़ाते हैं और पकड़े जाने पर प्रतिबंधित कर दिए जाते है। कई बार खिलाड़ी बीमारी के दौरान जानकारी के अभाव में कुछ प्रतिबंधित दवाएं ले लेता है और डोपिंग में फंस जाता है।जाने अंजाने कई भारतीय खिलाड़ी डोप के डंक मे फँस चुके हैं|रियो ओलंपिक से पहले नामी पहलवान नरसिंह यादव का मामला प्रकाश मे आया था| आरोप प्रत्यारोपों का दौर चला और एक दमदार पहलवान को खोना पड़ा| भारतीय खिलाड़ियों ने अनेक अवसरों पर अपयश कमाया है | फिलहाल डोप के मामलों मे भारत छठे नंबर पर है|

डाक्टर जैन के अनुसार खेलों में बढ़ते हुए मान सम्मान और पैसे के लिए कुछ खिलाड़ी जाने अनजाने में इस तरह की दवाइयों का सेवन करते हैं और पकड़े जाने पर उन पर 2 साल से लेकर 8 साल तक का प्रतिबंध लग जाता है और उनका पूरा कैरियर खराब हो जाता है इसलिए आज जरूरत इस बात की है के हमारे खिलाड़ियों को शुरुआत से ही इन दवाइयों के बारे में जानकारी दी जाए जिससे कि वह लोग इनका सेवन ना करें।उन्हें भरोसा है कि नाडा और पेफ़ी का प्रयास ज़रूर रंग लाएगा|

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