आईपीएल मालामाल,बाकी लीग कंगाल

आईपीएल मालामाल,बाकी लीग कंगाल

राजेन्द्र सजवान
लगभग चालीस साल पहले जब कैरी पैकर ने दुनिया भर के क्रिकेट देशों को सीमित ओवर क्रिकेट में झोंका था तो उसे सनकी कहा गया और उसके प्रयोग को क्रिकेट सर्कस या पजामा क्रिकेट जैसे नामों से पुकारा गया । तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन क्रिकेट का छोटा रूप पूरे क्रिकेट जगत में छा जाएगा और भारत क्रिकेट का सबसे बड़ा कारोबार चलाएगा।
भले ही कुछ सालों के लिए पैकर का फार्मूला थम गया लेकिन भारत मे इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत क्रिकेट खिलाड़ियों,आई सीसी, क्रिकेट बोर्डों,अधिकारियों,आयोजको और प्रयोजजों तथा क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक ऐसी सौगात लेकर आया जिसने टेस्ट क्रिकेट का कद भले ही छोटा किया पर खिलाड़ी और उनके बोर्ड माला माल हो गए।

आई पी एल की शुरुआत 2008 में हुई थी ।हालांकि आई सी एल पहले आई पर ज्यादा दिन नहीं टिक पाई।आई पीएल जल्द ही विश्व क्रिकेट की सबसे धनाढ्य लीग बन गयी। इसके बाद तो आईपीएल की तर्ज पर दुनियाभर में टी 20 लीग की बाढ़ आ गयी। आस्ट्रेलिया में 2011 में बिग बैश लीग शुरू की और फिर 2015 से महिला बिग बैश लीग शुरू कर दी।

आईपीएल की तरह फ्रेंचाइजी आधारित लीग कई अन्य देशों में भी शुरू की गयी। आस्ट्रेलिया के अलावा बांग्लादेश में 2012 से बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल), वेस्टइंडीज में 2013 से कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल), पाकिस्तान में 2016 से पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल), दक्षिण अफ्रीका में 2018 से मजांसी सुपर लीग (एमएसएल) और अफगानिस्तान में 2018 से अफगानिस्तान प्रीमियर लीग (एपीएल) की शुरुआत हुई। पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों के प्रीमियर लीग संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किये जाते हैं। श्रीलंका में 2011 से 2016 तक श्रीलंका प्रीमियर लीग का आयोजन किया गया लेकिन पर्याप्त प्रायोजक नहीं मिलने के कारण उसे बंद कर दिया गया। अब श्रीलंका का लंका प्रीमियर लीग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यहां तक संन्यास ले चुके खिलाड़ियों के लिये 2016 से यूएई में मास्टर्स चैंपियन्स लीग का आयोजन किया जा रहा है। इंग्लैंड में दुनिया भर की इन लीग की तरह 2018 से टी20 ब्लास्ट शुरू किया गया है जिसमें वहां की काउंटी टीमेें भाग लेती हैं। इंग्लैंड में वैसे महिलाओं के लिये 2016 से फ्रेंचाइजी आधारित महिला क्रिकेट सुपर लीग शुरू की गयी थी।
भले ही भारत की तर्ज पर अन्य देश भी लीग आयोजित कर रहे हैं लेकिन आई पी एल जैसा जलवा कहीं और देखने को नहीं मिलता रुपये-डालरों की बरसात के चलते गुमनाम और नामवर सभी खिलाड़ी मालामाल हो रहे हैं।बेशक,भारतीय खिलाड़ी अन्य की तुलना में कही ज्यादा पा रहे हैं।लेकिन भारतीय बोर्ड उन्हें किसी अन्य देश की लीग में खेलने से रोकता है ।

लीग क्रिकेट कल्चर जहां एक ओर खिलाड़ी,बोर्ड और इससे जुड़े तमाम लोगों और संस्थाओं को माला माल कर रहा है तो वेस्ट इंडीज और कुछ और देशों की क्रिकेट बर्बादी के कगार तक जा पहुंची है ।गेल, ब्रावो,रसेल,सुनील नारायण जैसे क्रिकेटर कमाई के चक्कर मे देश के लिए यदा कदा ही खेलते हैं ।
आईपीएल फ्रेंचाइजी रायल चैलेंजर्स बेंगलूर भारतीय कप्तान विराट कोहली को अभी एक साल के लिये 17 करोड़ रूपये का भुगतान कर रही है। महेंद्र सिंह धोनी (चेन्नई सुपर किंग्स) और रोहित शर्मा (मुंबई) इंडियन्स को 15 —15 करोड़ रूपये मिल रहे हैं। एबी डिविलियर्स, बेन स्टोक्स जैसे विदेशी खिलाड़ी भी 11 करोड़ रूपये से अधिक धनराशि अपनी जेब में डालते हैं। धोनी आईपीएल से अब तक 122.8 करोड़, रोहति 116.8 करोड़ और कोहली 109.2 करोड़ रूपये कमा चुके हैं। शेन वाटसन की उम्र बढ़ने के साथ कीमत कम हुई है लेकिन आईपीएल से अब तक वह 73 करोड़ रूपये से अधिक की कमाई कर चुके हैं। आईपीएल में मोटी धनराशि मिलने के कारण ही दुनिया भर के क्रिकेटरों के लिये यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है क्योंकि अन्य फ्रेंचाइजी लीग से उन्हें इतनी अधिक कमाई नहीं होती है।

आईपीएल का सेलरी कैप जहां 82 करोड़ रूपये है वहीं बिग बैश लीग का 1,700,000 डालर (लगभग 12 करोड़ 14 लाख रूपये) है। आईपीएल में 2019 की नीलामी में अनजान खिलाड़ी वरूण चक्रवर्ती को 8.4 करोड़ रूपये में जबकि शिवम दुबे को पांच करोड़ रूपये में खरीदा गया। किसी ने परबसिमरन सिंह का नाम नहीं सुना होगा लेकिन उसे आईपीएल में 4.8 करोड़ रूपये में खरीदा जाता है विदेशी लीग में इतनी धनराशि चोटी के खिलाड़ी को भी नहीं मिलती है। उदाहरण के लिये कैरेबियन प्रीमियर लीग में क्रिस गेल जैसे खिलाड़ियों को सबसे अधिक धनराशि पर खरीदा गया और यह राशि 160000 डालर यानि लगभग एक करोड़ 14 लाख रूपये बैठती है। बांग्लादेश प्रीमियर लीग और पाकिस्तान प्रीमियर लीग में सबसे अधिक धनराशि पाने वाले खिलाड़ी को दो लाख डालर (लगभग एक करोड़ 43 लाख रूपये) ही मिलते हैं। अफगानिस्तान और दक्षिण अफ्रीकी लीग में खिलाड़ी बमुश्किल करोड़पति बनते हैं। बिग बैश लीग में तो स्थिति और खराब है और यहां किसी विदेशी खिलाड़ी को दो महीने खेलने पर 65 से 70 लाख रूपये ही मिल पाते हैं। अर्थात आई पी एल के आगे किसी की कोई हैसियत नहीं है ।

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