घर के शेर,घर मे ढेर

राजेंद्र सजवान
कल तक जिस भारतीय टीम को घर की शेर कहा जा रहा था, उसने अपने घर आस्ट्रेलिया के हाथों एक दिवसीय शृंखला गँवा कर ना सिर्फ़ विश्व कप की तैयारियों पर सवालिया निशान खड़ा किया है अपितु आलोचकों को गरजने बरसने का मौका भी दिया है| दिल्ली मे खेले गए निर्णायक मुक़ाबले मे कप्तान जिस टीम को लेकर उतरे थे उसे विश्व कप की अंतिम इलेवन या उसके आस पास बता रहे थे|

हालाँकि मैच और शृंखला हारने के बाद भी वह अपने बयान पर अडिग हैं परंतु देश के क्रिकेट जानकार, एक्सपर्ट्स और पूर्व खिलाड़ी विराट से इतफाक नहीं रखने| ख़ासकर, पहले दो मैच जीतने के बाद भारत ने जिस अंदाज मे लगातार तीन मैच हारे, उसे लेकर हर कोई कह रहा है कि ऐसे तो यह टीम विश्व कप नहीं जीत सकती| टीम प्रबंधन, कोच, कप्तान, और खिलाड़ी भले ही क्रिकेट बाय चान्स जैसे बहाने बना कर अपना बचाव करना चाहें किंतु सुनील गावसकर, कपिल देव, बिशन बेदी, मनिंदर सिंह, सहवाग, लक्ष्मण और तमाम पूर्व खिलाड़ी गुस्से से भरे हैं और यहाँ तक कहने लगे हैं कि इस टीम मे खिताब जीतने का माद्दा नहीं है|

30 मई से ब्रिटेन मे शुरू हो रहे विश्व कप मे भारत को अपना पहला मैच पाँच जून को दक्षिण अफ्रीका से खेलना है| इस बीच ग़लतियाँ सुधारने के लिए और कोई अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेला जाना है| अर्थात विश्व कप से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट के सामने समस्याओं का अंबार लग गया है| सबसे बड़ी चुनौती टीम के गठन की है| अंतिम इलेवन को लेकर भले ही कप्तान विराट और कोच-मैनेजर कुछ भी सफाई दें, लेकिन बल्लेबाजी और गेंदबाजी का संतुलन बार- बार गड़बड़ा रहा है| विराट, शिखर और रोहित की बल्लेबाजी का लोहा हर कोई मानता है पर मौके पर टीम को मझधार मे छोड़ जाने की उन्हें जैसे आदत सी पड़ गई है| चौथे नंबर का बल्लेबाज कौन होगा, यह सवाल हर कोई पूछ रहा है| फिलहाल, इस स्थान पर रायुडु, धोनी, पंत, विजय शंकर आदि आज़माए जा चुके हैं लेकिन कोई भी टीम की ज़रूरतों पर खरा नहीं उतर पा रहा|

भारतीय टीम को लेकर क्रिकेट जानकार इसलिए भी डरे सहमे हैं क्योंकि, जिस कंगारू टीम ने उसे घर मे घुस कर पीटा है, उसने जनवरी 2017 से अब तक लगातार हार का स्वाद चखा और क्रमश: घर-बाहर, न्यूज़ीलैंड, भारत, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका से एकदिनी शृंखलाएँ हारीं| लंबे समय बाद उसने घर के शेर को ढेर किया है, वह भी विश्व कप से ढाई महीने पहले| बेशक, टीम इंडिया की चिंता बढ़नी स्वाभाविक है| जिस टीम को चन्द सप्ताह पहले खिताब की प्रबल दावेदार कहा जा रहा था उसकी उम्मीदें टूटती बिखरती नज़र आ रही हैं| उसका मनोबल गिर सकता है और आत्मविश्वास की कमी उसे शिखर से पटक सकती है|

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