डोपिंग से निपटने के लिए पेफी ने कमर कसी

राजेंद्र सजवान

जैसे जैसे भारत मे खेलों के प्रति रुझान बढ़ रहा है, खिलाड़ियों द्वारा डोप लेने और नशाखोरी की घटनाएँ भी बढ़ रही हैं| ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार भारत को डोप लेने वाले देशों मे अब छठा स्थान प्राप्त है, जबकि कुछ महीने पहले तक भारत तीसरे नंबर पर था| हैरानी वाली बात यह है कि खेलो इंडिया जैसे छोटी उम्र के आयोजनों मे भी भारतीय खिलाड़ी डोप ले रहे हैं| हाल ही मे नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी(नाडा) ने कई कम उम्र के भारतीय खिलाड़ियों को लपेटे मे लिया है| खेल मंत्रालय और खेल प्राधिकरण ने इस समस्या से निपटने के गंभीर प्रयास शुरू किए हैं |

इस कोशिश मे फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया (पेफी) एवं नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी लगातार प्रयासरत हैं| हाल ही मे पेफ़ी ने भारतीय खेल मंत्रालय के साथ मिल कर खिलाड़ियों और कोचों को जागरूक करने के लिए दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया था जिसमे खेल मंत्री राज्य वर्धन राठौर, पंजाब सरकार के खेल मंत्री, पेफ़ी के सचिव डाक्टर पीयूष जैन और देश की जानी मानी खेल हस्तियाँ शामिल हुई थीं| अगला आयोजन स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाडा विश्विद्यालय, नांदेड (महाराष्ट्र) में होने जा रहा है|

दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन डोपिंग, शारीरिक शिक्षा एवं खेल कूद विज्ञान विषय पर 27 – 28 मार्च 2019 को किया जाएगा जिसमे देशभर के सभी राज्यों से करीब 200 खिलाड़ी, प्रशिक्षक, स्कूलों और कालेजों में कार्यरत शारीरिक शिक्षक खेल पत्रकारिता के दिग्गज पत्रकारों सहित, खेलकूद से जुड़े लोग शामिल होंगे। फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के सचिव डॉ. पियूष जैन ने बताया की पूरे देश के करीब 20 विश्वविद्यालयों में पेफी और नाडा द्वारा इस तरह की कांफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है जिससे की कि खेलों में बढ़ती हुई प्रतिबंधित दवाइयों के सेवन के खिलाफ खिलाड़ी और प्रशिक्षकों को जागरूक किया जा सके|

जाने- अनजाने में खिलाड़ियों के द्वारा प्रतिबंधित दवाइयां लेने से न केवल उनके कैरियर पर प्रभाव पड़ता है साथ ही साथ उनके स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। डॉ. जैन केअनुसार खेल जगत में बढ़ती प्रतिस्पर्घा और पदक जीतने के जुनून में खिलाड़ी डोपिंग के जरिए अपना शारीरिक दमखम बढ़ाते हैं और पकड़े जाने पर प्रतिबंधित कर दिए जाते है। कई बार खिलाड़ी बीमारी के दौरान जानकारी के अभाव में कुछ प्रतिबंधित दवाएं ले लेता है और डोपिंग में फंस जाता है। भारत मे इस बीमारी के फैलने का बड़ा कारण यह भी माना जाता है क़ि पदक जीतने पर खिलाड़ियों को लाखों-करोड़ों मिल रहे है| ऐसे मे हर खिलाड़ी रातों रात स्टार और करोड़पति बनना चाहता है और वह ग़लत ट्रैक पर चल पड़ता है|

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