क्रिकेट विज्ञान–पंत

राजेंद्र सजवान,
क्रिकेट सिर्फ़ एक खेल नहीं, यह अपने किस्म की एक ऐसी कला है,जिसमे पारंगत होकर खिलाड़ियों ने महानता को छुआ और कुछ एक को क्रिकेट का भगवान तक कहा गया| मसलन सर डान ब्रैडमैन, सुनील गावसकर, विव रिचर्ड्स, सचिन तेंदुलकर और कई अन्य खिलाड़ियों ने अपने हुनर को कुछ ऐसा विकसित किया कि उन्हें असाधारण खिलाड़ी कहा जाने लगा है| अनेक क्रिककेटर ऐसे हुए हैं जिन्होने अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी मे लगातार प्रयोग किए, जोकि वैज्ञानिक प्रयोगों की तरह अपनाए गये| इसी प्रकार, कप्तानी, अंपायरिंग, क्षेत्ररक्षण, विकेटकीपिंग, आदि क्षेत्रों मे भी लगातार प्रयोग किए गये, जिनसे खेल ना सिर्फ़ रोमांचक हुआ अपितु उसके रूप स्वरूप मे भी दर्शनीय परिवर्तन देखा गया|

हाल ही मे पीटीआई भाषा के वरिष्ठ पत्रकार धर्मेन्द्र पंत द्वारा लिखी गई किताब ‘क्रिकेट विज्ञान’ देश भर के क्रिकेट प्रेमियों मे ख़ासी चर्चित है, जिसे लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है| क्रिकेट प्रेमियों, खिलाड़ियों, प्रशासकों आदि की अपनी अपनी राय है| पंत ने इसकिताब को लिखने में लगभग 12 साल लगाए और क्रिकेट से जुड़ी तमाम जानकारियों का गंभीर अध्यन किया। उनके अनुसार 1877 मे मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर मेजबान आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेले गये पहले टेस्ट मैच से लेकर आईपीएल 2019 तक इस खेल ने कई बदलाव देखे हैं| शुरुआती दिनों मे इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका ही सक्रिय क्रिकेट मे शामिल थे| तब पाँच, छह और आठ गेंदों तक के ओवर प्रचलन मे थे|

1971 मे आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेला गया और चार साल बाद 1975 मे पहला विश्व कप आयोजित किया गया| टी 20 का पहला विश्व कप 2007 मे आयोजित हुआ जिसे भारत ने जीता और अब भारत मे आयोजित आईपीएल दुनियाभर के क्रिकेटरों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है| क्रिकेट की इस विकास प्रक्रिया को क्रिकेट विज्ञान के उत्थान के साथ देखा जा रहा है| क्रिकेट को इसलिए विज्ञान के साथ जोड़ा जा रहा है क्योंकि क्योंकि, लैग ग्लान्स,कैरम बाल, ड्राइव, कट, पुल, स्वीप, गुगली, लेग कटर, इंस्विंग, आर्मबाल आदि टर्म खेल के विकास के साथ अस्तित्व मे आए| इन विधाओं मे महारथ हासिल करने वाले खिलाड़ियों को कुशल वैज्ञानिकों जैसा सम्मान दिया गया| ऐसा माना जाता है कि यदि गुगली नहीं होती तो महान ड़ान ब्रैडमैन का टेस्ट औसत 100 से अधिक होता|

इस विधा मे शेन वार्न,अनिल कुंबले,अब्दुल क़ादिर, बेनो, सुभाष गुप्ते आदि ने महारत हासिल की| इसी प्रकार फ्लिपर, चाइनामैन जैसे संबोधन अस्तित्व मे आए| क्रिकेट और अन्य भारतीय खेलों के बीच के फ़र्क के रूप मे देखें तो जहाँ एक ओर हॉकी , फुटबॉल, एथलेटिक, तैराकी, और तमाम ओलंपिक खेलों मे वही पुराने तौर तरीके अपनाए जा रहे हैं तो भारतीय क्रिकेट ने समय के साथ आए बदलाओं को बखूबी अपनाया और लगातार सुधार किया| लेखक के अनुसार क्रिकेट ने अपना कला स्वरूप तो बनाए रखा साथ ही नये नये प्रयोगों से खेल को और अधिक गतिमान, रोचक और रोमांचक भी बनाया है|

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.