दावा ओलंपिक लूटने का!

राजेंद्र सजवान

जब भी ओलंपिक खेल नज़दीक आते हैं भारतीय खेलों के ठेकेदार अपने अपने अंदाज मे दावे करने लगते हैं, जैसा कि टोक्यो ओलंपिक को लेकर खोखले दावों का सिलसिला चल निकला है| कोई कह रहा है कि भारतीय खिलाड़ी 10 से 20 पदक जीत सकते हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें नहीं लगता कि भारत पदक तालिका मे सम्मान जनक स्थान बना पाएगा| एक झूठी कंपनी ने फिर से सर्वे किया है कि भारत को दर्जन भर पदक मिलेंगे| यही सर्वे उसने 2016 के रियो ओलंपिक से पहले भी उछाला था और खेल मंत्री सोनोवाल ने तो 12 पदक मिलने का सुर्रा तक छोड़ दिया था| लेकिन भारत के खाते मे मात्र दो पदक आए थे|

उस समय जबकि खेल अपने अंतिम पड़ाव पर थे, पहलवान साक्षी मलिक के कांस्य और बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के रजत पदक ने 130 करोड़ की आबादी वाले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की लाज बचा ली| 2020 के टोक्यो ओलंपिक के लिए एक साल से कुछ ज़्यादा समय बचा है| इस बार टारगेट 15 पदक के आस पास का बताया जा रहा है| दावा यह भी किया जा रहा है कि 2028 के ओलंपिक तक भारत सुपर  पावर  अमेरिका और चीन को टक्कर देने की स्थिति मे पहुँच जाएगा| लेकिन खेल मंत्रालय, साई, खेल संघों और आईओए के अधिकारियों से पूछा जाए तो एक दो खेलों और चार पाँच खिलाड़ियों से ज़्यादा के नाम बताने मे सभी कतरा रहे हैं| इस संवाददाता ने जब देश के खेल जानकारों और कुछ पूर्व खिलाड़ियोंसे पूछा तो कोई भी यह दावा करने के लिए तैयार नहीं कि भारत किस खेल मे पदक जीतने का दावेदार है|

कुश्ती मे बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट, बैडमिंटन मे सिंधु, श्रीकांत, सायना, कुछ एक निशाने बाज और शायद कोई मुक्केबाज़ पदक की दौड़ मे शामिल हो सकते है लेकिन एक भी भारतीय खिलाड़ी ऐसा नहीं जो ओलंपिक मे स्वर्ण पदक के लिए ताल ठोक सके| हाँ, पहलवान बजरंग पूनिया, एकमात्र ऐसा खिलाड़ी है जिसने टोक्यों मे स्वर्ण जीतने का दृढ़ इरादा व्यक्त किया है| एथलेटिक मे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है पर पदक जीतने का दम कोई नहीं भरना चाहता| जिन खिलाड़ियों की ओलंपिक तैयारी पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं उन्हें पूछा जाए तो सभी कहते हैं कि देश के लिए अपना श्रेष्ठ देंगे| लेकिन क्या यह श्रेष्ठ पदक जीतने के लिए काफ़ी होगा? एक सर्वे से पता चला है कि ज़्यादातर खेलों मे भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक पदक के आस पास भी नज़र नहीं आते| ख़ासकर, टीम खेलों मे तो हमारे खिलाड़ी लगातार पिछड़ रहे हैं| जी हाँ, हॉकी पर से भी भरोसा उठने लगा है|

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.