यह मेसी कौन से प्लेनेट से आया है…?

राजेंद्र सजवान
बुधवार को देर रात खेले गये चैम्पियंस लीग के दूसरे सेमीफाइनल के पहले चरण के मुक़ाबले से पहले दुनिया भर के फुटबॉल एक्सपर्ट दावा कर रहे थे कि लिवरपूल की रक्षापंक्ति ने बार्सिलोना के लियोन मेसी को चक्रव्यूह मे जकड़ने के लिए ऐसी रणनीति तैयार की है कि वह दौड़ना तो दूर चलना भी भूल जाएगा| कोच जुर्जेन के शातिर दिमाग़ और उनके रक्षकों वान डिज़्क, अलेक्जेंडर,आर्नोल्ड और राबर्टसन की नज़र और पकड़ को बाज की तरह बखान किया गया और यहाँ तक कहा गया कि मेसी की अब खैर नहीं और उसका कोई भी दाँव नहीं चलने वाला| और मेसी नहीं चला तो समझलें बार्सिलोना को लिवरपूल के पंजे से कोई नहीं बचा सकता|

लेकिन नतीजा रहा 3-0, जिसमे से दो गोल मेसी ने जमाए और एक गोल मे भागीदारी निभाई| इसके साथ ही कुछ लोग फिर से पूछने लगे हैं कि यह मेसी कौन से प्लेनेट से आया है! हालाँकि अभी दोनों टीमों के बीच एक और और मैच खेला जाना है और यदि लिवरपूल बड़े अंतर से जीता तो आगे बढ़ सकता है| लेकिन मेसी ने अपने क्लब को उस मुकाम तक पहुँचा दिया है, जहाँ से कोई चमत्कार ही लिवरपूल से उलटफेर करा सकता है| बार्सिलोना के कप्तान ने दिखा दिया है कि उसे यूँ ही दुनिया का महानतम खिलाड़ी यूँ ही नहीं कहते| उसने अपने फुटवर्क, तेज़तर्रार ड्रिब्बलिंग, कम्ररतोड़ और चतुराई पूर्ण डाज, चपलता और अचूक निशानेबाज़ी से दिखा दिया कि वह फुटबॉल इतिहास का श्रेष्ठ फुटबॉल खिलाड़ी यूँ ही नहीं कहलाता| भले ही अर्जेंटीना ने उसके रहते वर्ल्ड कप नहीं जीता लेकिन जो काम पेले और माराडोना जैसे चैम्पियन नहीं कर पाए, उसने बार-बार- और लगातार किया|

लिवरपूल के विरुढ़ उसका तीसरा गोल ना सिर्फ़ कलात्मक और जादुई था अपितु ऐसा था जो सिर्फ़ मेसी ही कर सकता है| घुमाव लेती हुई फ्री किक रक्षा दीवार को भेदते हुए जाल मे ऐसे लटक गई, जैसे कोई राकेट बादलों को चीरता हुआ अपने लक्ष्य तक पहुँचा हो| विपक्षी रक्षकों को उसने जैसे सम्मोहित कर दिया था| रोकना तो दूर, उसे छू भी नहीं पा रहे थे| रिकार्ड बुक के अनुसार 2005 में इसी मैदान पर मेसी ने बार्सिलोना के लिए अपना पहला गोल जमाया था और अब लिवरपूल की धुलाई के साथ अपने गोलों की संख्या 600 तक पहुँचा दी है| यूँ तो मेसी का कोई आलोचक नहीं क्योंकि वह बेहद विनम्र खिलाड़ी और नेक इंसान हैं लेकिन जो कोई है वह भी पीठ पीछे इस महान खिलाड़ी की तारीफ करते नहीं थकता| हैरानी वाली बात यह है कि उम्र बढ़ने के साथ मेसी के खेल मे और ज़्यादा निखार आया है| अभी उसके तरकश मे कई तीर हैं जिनसे पता नहीं कितने शिकार होंगे और कितने अवॉर्ड बार्सिलोना की झोली मे गिरेंगे| फिलहाल फुटबॉल जगत वाह बार्सिलोना, वाह वाह मेसी, कर रहा है|

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