सचिन पर सवाल अर्थात भारत रत्न की गरिमा पर प्रहार

राजेंद्र सजवान

इसमे दो राय नहीं कि सचिन तेंदुलकर भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल बल्लेबाज रहे हैं और शायदअपने बल्ले के दम पर ही उन्हें भारत रत्न के रूप मे सबसे बड़ा राष्ट्रीय सम्मान मिला है। कुछजानकारों की राय मे सुनील गावसकर भारत के सबसे मंजे मंजे हुए और परफ़ेक्ट टेस्ट बल्लेबाज आँकेजाते हैं। लेकिन सचिन ने क्रिकेट की हर शैली मे अपने बल्ले से बेहतर प्रदर्शन किया और वह सम्मानपाया जिसे आज तक भारत का कोई भी खिलाड़ी हासिल नहीं कर पाया था। लेकिन आज उसी सचिनपर हितों से टकराव का आरोप लगाया जा रहा है।

सचिन और लक्ष्मण पर आरोप लगाया जा रहा है किउन्होने क्रिकेट सलाहकार समिति के सदस्य और अपनी संबंधित फ्रेंचाईजियों, क्रमश: मुंबई इंडियन्सएवम् सनराइजर्स हैदराबाद के साथ हितों के टकराव का दोहरा लाभ उठाया है। दोनों खिलाड़ियों ने इनआरोपों को निराधार बताया है और भारतीय क्रिकेट बोर्ड भी दोनों को बेक़ुसूर बताता है,और उनकीहरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया है।लेकिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का एक ऐसा वर्ग भी हैजोकि यह मानता है कि सचिन पर कोई भी उंगली उठना सबसे बड़े नागरिक सम्मान की प्रतिष्ठा परसवाल खड़ा करने जैसा है। उनकी राय मे हितों का टकराव तो बाद की बात है, पहले सवाल यह खड़ाहोता है कि सचिन जैसे महान खिलाड़ी को बेकार के विवाद मे पड़ने की ज़रूरत ही क्या है! बेशक,उनके बारे मे किसी भी प्रकार के आरोप का सीधा सा मतलब है कि भारत रत्न की गरिमा पर चोट कीजा रही है। चूँकि उन पर शायद पहली बार कोई सवाल खड़ा हुआ है इसलिए खुशफुसाहट भी शुरू होगई है।

संभवतया, वह ऐसे पहले भारत रत्न हैं जोकि कई कंपनियों और उत्पादों के साथ ब्रांडएम्बेसडर के रूप मे जुड़े हैं। भारत रत्न पाने के बाद भी वह टायर, बिस्कुट, सीमेंट, कोका कोला, इंजनआयल, जनरेटर, बूस्ट, घड़ियाँ बनाने वाली कंपनियों; जूते निर्माता, जीवन बीमा, स्किल इंडिया,आईओए, आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप, यूनिसेफ़, वीज़ा, आदि के एड और प्रचार-प्रसार से जुड़े रहे हैं।ऐसी भूमिका में पहले कभी किसी भारत रत्न को शायद ही देखा गया हो। बेशक, आज के युग मे हरखिलाड़ी और अवॉर्डी को अपने तरीके से जीने और खाने कमाने की आज़ादी है। लेकिन सचिन काकद बहुत उँचा है। वरना हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचन्द की अनदेखी कर उन्हें भारत रत्न बिन माँगे हीनहीं मिल जाता। ध्यान चन्द जो सम्मान जीतेजी और मौत के बाद की लड़ाई के बावजूद नहीं पा सके,वह सचिन को कैसे मिल गया, यह सवाल अब बेमानी है। लेकिन भारत रत्न की गरिमा को बनाएरखना ज़रूरी है, वरना सवालभी पूछा जाएगा और उंगलियाँ उठती रहेंगी।

सचिन पर सवाल अर्थात भारत रत्न की गरिमा पर प्रहार

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