एक और लीग: कबड्डी का कबाड़ा तय

राजेंद्र सजवान
इसमे दो राय नहीं कि देश मे आयोजित होने वाली विभिन्न खेलों की पेशेवर लीग मे आईपीएल का ग्राफ सबसे उँचा है और लगातार उठता जा रहा है| दूसरे नंबर पर शायद प्रो.कबड्डी लीग आती है| कुश्ती और आईएसएल भी ख़ासी पसंद की जाती हैं| लेकिन जकार्ता एशियाई खेलों मे भारतीय कबड्डी टीमों के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद से देश मे कबड्डी का कारोबार करने वाले, खिलाड़ी और उनके प्रोमोटर लुकते छिपते फिर रहे हैं|

आयोजकों ने खुद स्वीकार किया है कि प्रो.कबड्डी लीग की लोकप्रियता और टीआरपी पर असर पड़ा है| ऐसे मे जबकि ईरान के हाथों पिटने वाली भारतीय टीमों के खिलाड़ियों को को कबड्डी प्रेमियों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है और यहाँ तक माना जा रहा है कि धीरे धीरे यह खेल हॉकी की तरह पतन की तरफ बढ़ रहा है, एक और कबड्डी लीग के आयोजन की घोषणा हो चुकी है और बाक़ायदा 13 मई को पुणे मे लीग का उद्घाटन हो रहा है| बेशक, इस आयोजन की बागडोर कबड्डी फ़ेडेरेशन से नाराज़ या निकाले गये अवसरवादियों द्वारा किया जा रहा है|

न्यू कबड्डी फ़ेडेरेशन के बैनर तले इंडो इंटरनेशनल कबड्डी लीग(आईपीकेएल) मे आठ टीमें भाग ले रही हैं, जिनमे 160 भारतीय और16 विदेशी खिलाड़ी शामिल हैं| तीन शहरों, पुणे, मैसुरु और बंगलूरु मे कुल 44 मैच खेले जाने हैं| लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि एक तरफ तो दो निश्चित स्वर्ण पदक खोने के बाद कबड्डी से आम देशवासी नाराज़ चल रहा है तो दूसरी तरफ एक और आयोजन लाद दिया गया है| कुछ पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और अर्जुन अवॉर्डी को नहीं लगता कि फिलहाल एक और आयोजन की ज़रूरत है| ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि एक धड़ा फेडरेशन अधिकारियों से खफा है और कोर्ट मे केस चल रहा है| दावा यह भी किया जा रहा है कि आईपीकेएल का पलड़ा भारी है| लेकिन जहाँ तक लीग की बात है तो प्रो.लीग अपना अलग स्थान बना चुकी है और तमाम स्टार खिलाड़ी उसके साथ जुड़े हैं|

समानांतर लीग मे सिर्फ़ खुरचन बची है| यदि कुछ उल्लेखनीय है तो क्रिकेट खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग को ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया है| वरना नई लीग के पास एक भी बड़े नाम वाला खिलाड़ी शामिल नहीं है| देखने वाली बात यह भी होगी कि खिलाड़ियों को क्या मिलता है, क्योंकि प्रो.लीग मे तो कई खिलाड़ी एक करोड़ से पार निकल गये हैं| हालाँकि दो आयोजनों से खिलाड़ियों को फ़ायदा हो सकता है और जो उपेक्षित थे उन्हें खेलने और खाने कमाने का मौका मिलेगा| लेकिन आईपीएल और आईसीएल की लड़ाई का क्या हाल हुआ था किसी से छिपा नहीं है! हो सकता है अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही भारतीय कबड्डी का पूरी तरह कबाड़ा हो जाए| फिलहाल ओलंपिक मे तो यह खेल शामिल नहीं होने वाला और एशियाड मे हम कबड्डी को खो चुके हैं|

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