खिलाड़ी नेता किस काम के!

राजेंद्र सजवान
एक और आम चुनाव अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच गया है| सत्ता पक्ष-विपक्ष के सभी दलों ने जीत के लिए सभी नाजायज़ हथकंडे अपनाए और अब 23 मार्च को पता चल जाएगा कि देश को कौन सी पार्टी लीड करेगी| जीते कोई भी, इतना तय है कि विजेता के पास देश के खेलों को देने के कुछ खास नहीं होगा| ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्‍योंकि किसी भी पार्टी ने खिलाड़ियों से कोई वादा नहीं किया है| किसी ने भी नहीं कहा कि देश के खेलों को नाकामी से उबारने के लिए उनके पास क्या योजना है|

हैरानी वाली बात यह है कि एक तरफ तो हमारी सरकारें, खेल मंत्रालय खेल संघ और ओलंपिक संघ भारत को खेल महांशक्ति बनाने का दम भरते हैं, झूठे वादे करते हैं तो दूसरी तरफ आलम यह है कि आम चुनाओं या अन्य चुनाओं मे खेल को कभी भी बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाता| देश के आम खिलाड़ी और मतदाता को शिकायत है कि किसी भी दल ने खेलों को अपने चुनाव घोषणापत्र मे गंभीरता से नहीं लिया| किसी ने भी नहीं कहा कि ओलंपिक खेलों के प्रचार-प्रसार और अधिकाधिक पदक जीतने के लिए क्या कुछ करेंगे|

भले ही कुछ खेल हस्तियों को प्रत्याशी बनाया गया, उन्हें चुनाओं मे इस्तेमाल किया गया पर जितने भी खिलाड़ी मैदान मे उतारे गये उनमे से किसी ने भी यह नहीं कहा कि देश के खेलों और खिलाड़ियों को देने के लिए उनके पास क्या और कितना खास है| अफ़सोस की बात यह है कि खिलाड़ी से नेता बन चुके या नेतागिरी चमकाने के की ओर बढ़ रहे हमारे तमाम खिलाड़ी आम सड़क छाप नेताओं की तरह सिर्फ़ प्रतिद्वंदियों को गालियाँ देते रहे| उनकी ज़ुबान पर एक दूसरे को कोसने के सिवा कुछ भी नहीं था| किसी ने भी अपने खेल या अन्य खेलों के उत्थान की बात नहीं की|

किसी ने भी नहीं कहा कि उसका इरादा देश मे एक सर्वमान्य खेल विधेयक पास कराने का है| कोई भी इतना साहस नहीं दिखा पाया कि भारतीय खेलों मे जमे बैठे मठाधीसों को कोस सके या खेलों को राजनीतिमुक्त करने का विश्वास दिला सके| खेलों मे बढ़ रहे परिवारवाद और भ्रष्टाचार पर उनकी बोलती बंद रही| फिर भला ऐसे खिलाड़ी नेता किस काम के| उनकी हार जीत से खेलों को कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला| राजनीतिक पार्टियों ने उनका इस्तेमाल किया और संसद मे पहुँच गये तो सता सुख भोगने के अलावा खिलाड़ियों को देने के लिए उनके पास भी सिर्फ़ कोरे वादे होंगे, जैसा कि अब तक तमाम खिलाड़ी नेता करते आए हैं| अर्थात भारत को खेल महाशक्ति बनाने के खोखले नारे उनकी ज़ुबाँ पर रहेंगे|

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