बदल गई क्रिकेट: तब 60 ओवर मे 36 आजएक ओवर में 36

राजेंद्र सजवान
विश्व क्रिकेट के सफलतम टेस्ट बल्लेबाज और भारतीय टीम के कप्तान सुनील मनोहर गावसकर ने जब 1975 के पहले विश्व कप मे मेजबान इंग्लैंड के विरुद्ध 60ओवर मे मात्र 36 रन बनाए तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि 30-40 सालों मे क्रिकेट इस कदर बदल जाएगा| इंग्लैंड ने उस मैच मे भारत को 200 से अधिक रनों से हराया था और कई क्रिकेट एक्सपर्ट ने हार का ठीकरा गावसकर के सिर फोड़ा था| आज की क्रिकेट के लिहाज से देखें तो गावसकर सचमुच खलनायक लगते हैं जिसने 174 गेंद खेल कर अजेय 36 रन जुटाए| बेशक, तब भारतीय खिलाड़ियों को एकदिनी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव नहीं था और भारत को बेहद कमजोर प्रतिद्वंद्वी माना जाता था|

लेकिन अब बहुत कुछ बदल चुका है| 1983 और 2011 के विश्व खिताब जीतकर भारतीय खिलाड़ियों ने साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं हैं| तब वेस्ट इंडीज, इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया जैसी टीमों की तूती बोलती थी| वक्त के साथ-साथ भारी बदलाव देखने को मिले हैं, जिसकी ताज़ा मिसाल यह है कि इस बार विश्व कप मे किसी टीम द्वारा 500 रन बनाने ऐसी बातें की जा रही हैं|

एकदिनी और टी20 क्रिकेट ने ऐसा बदलाव ला दिया है कि जितने रन(36) गावसकर ने साठ ओवरों मे बनाए उतने कई बल्लेबाज एक ओवर मे बनाने पर आमादा हैं और कुछ एक तो बना भी चुके हैं| भले ही पेट्रन अलग हो पर हाल ही में संपन्न आईपी एल मुकाबलों मे वेस्ट इंडीज, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और भारत आदि देशों के बल्लेबाज़ों ने जैसा पराक्र्म दिखाया है, उसे देखकर कहा जा रहा है कि यह विश्व कप कई गेंदबाज़ों की क़ब्रगाह साबित होने जा रहा है और कईएक बड़बोले बल्लेबाज़ों की हेंकडी भी निकल जाएगी| वेस्ट इंडीज के खलीफा क्रिस गेल ने तो पहले ही गेंदबाज़ों को डराना धमकाना शुरू कर दिया है|

गेल कह रहे हैं कि इस बार उनका बल्ला कहर बरपाएगा| अर्थात गेल और उनके जैसे लगभग दर्जन भर बल्लेबाज अपने बल्लों को तेल पिला रहे हैं| उधर कई गेंदबाज भी उँची हांकने वालों को सबक सिखाने के लिए अपनी गेंदबाजी की धार पैनी कर रहे हैं| बदलती क्रिकेट के इस दौर मे विकेट कीपर से लेकर तमाम क्षेत्र रक्षक भी सौ फीसदी फिट और चुश्त-दुरुश्त नज़र आते हैं| दुर्लभ कैच पकड़ने और फील्डिंग मे जो टीम पारंगत होगी उसकी जीत के मौके उतने ही ज़्यादा रहेंगे|

अर्थात तीर-तुक्कों से मैचों के नतीजे तय नहीं होनेवाले| बेशक इस विश्व कप मे जीत उसी की होगी, जिस टीम के पास, दमदार, फिट, कौशल के धनी और परिस्थितियों के अनुरूप ढलने वाले असरदार खिलाड़ी होंगे| फिर चाहे वह आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड,न्यूजीलैंड, भारत हों या वेस्ट इंडीज या अफ़ग़ानिस्तान भी हो सकते हैं|

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