डॉक्टर बत्रा पहले भारतीय

राजेन्द्र सजवान
भले ही भारत ओलंपिक में बहुत अधिक पदक नहीं जीत पाया है लेकिन जिस खेल में भारतीय रिकार्ड सबसे शानदार रहा है, वह हॉकी ही है, जिसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर नरेंद्र ध्रुव बत्रा हैं। यह भी सच है कि उनके पदभार संभालने से पहले भारतीय हॉकी अपने श्रेष्ठ प्रदर्शन से बहुत नीचे उतर चुकी थी और लगभग बर्बादी की कगार पर पहुंच गई थी।लेकिन उनके अध्यक्ष बनते ही जैसे नए युग की शुरुआत हो गई।

लगभग खामोश हो चुकी हॉकी मे जैसे जान पड़ गई | खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाओं और हज़ारों-लाखों कमाने की शुरुआत हुई| एक ऐसा भी वक्त था जब विदेशी खिलाड़ी भारत मे खेलने से कतराते थे पर आज ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, हालैंड, इंग्लैंड आदि देशों के खिलाड़ी भारत मे खेलने का मौका ढूंढते हैं। भारत मे विश्व कप, विश्व कप क्वालीफायर, ओलंपिक क्वालीफायर और कई अन्य आयोजनों के पीछे उनका हाथ रहा। सही मायने में जबसे उन्होंने भारतीय हॉकी की बागडोर संभाली है भारत हॉकी का हब बन गया है। हॉकी इंडिया लीग विश्व हॉकी को उनकी ऐसी सौगात है जिसे हॉकी जगत भुला नहीं सकता।

थोड़े व्यवधान के बाद यह लीग फिर से शुरू होने वाली है। ठीक इसी प्रकार उनके आई ओ ए अध्यक्ष बनने के बाद से भारत मे ओलंपिक आयोजन की संभावना बढ़ गई है। अब उन्होने एक और मजबूत कदम बढ़ाया है| अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने उन्हें आई ओसी सदस्यों के लिए हुए चुनावों मे सफल घोषित किया है| श्री बत्रा को 60 मे से 58 वोट मिले, जोकि उनकी लोकप्रियता और कार्यप्रणाली की सफलता को दर्शाता है| एक साथ कई शीर्ष पद पाने वाले वह पहले भारतीय खेल प्रशासक हैं|

हाल ही मे एक साक्षात्कार मे उन्होने पंजाब केसरी को बताया कि भारत को ओलंपिक खेलों की मेजबानी दिलाना उनका सपना रहा है और भारत द्वारा 2032 के ओलंपिक खेलों के आयोजन का दावा पेश करेंगे| उनका मानना है कि ऐसे आयोजन से भारतीय खेलों की दिशा दशा बदल जाएगी| ठीक वैसे ही जैसे 1982 के दिल्ली एशियाड और 2010 के कामन वेल्थ खेलों के आयोजन से भारत में खेलों के लिए माहौल बनाने मे मदद मिली| यह सही है कि हॉकी उनके लिए प्राथमिकता वाला खेल है क्योंकि इसी खेल ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है|

वह मानते हैं कि लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद भी भारत ओलंपिक हॉकी पदक नहीं जीत पा रहा लेकिन अब उन्हें भरोसा है कि भारतीय हॉकी सही ट्रैक पर चल रही है और टोक्यो ओलंपिक में भारत कोई पदक जीत कर वापसी कर सकता है| भारत ने अपना आठवाँ और अब तक का आख़िरी स्वर्ण 1980 के मास्को ओलंपिक मे जीता था|

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.