अहंकार और पागल मीडिया ले डूबे

राजेंद्र सजवान

भारतीय क्रिकेट टीम का विश्व विजेता बनने का सपना टूट चुका हैं लेकिन पोस्टमॉर्टम बदस्तूर जारी है| कोई कप्तान कोहली को कोस रहा है तो कुछ एक रोहित शर्मा, पंत और पांड्या को बुरा भला कह रहे हैं| लेकिन पता नहीं क्यों कुछ तथाकथित क्रिकेट एक्सपर्ट महेंद्र सिंह धोनी को बलि का बकरा बना रहे हैं| सच्चाई यह है कि भारत को न्यूजीलैंड ने नहीं हराया और ना ही किसी एक खिलाड़ी का दोष है| दरअसल, इस हार के पीछे टीम इंडिया का अहंकार, मीडिया का पागलपन और खिलाड़ियों का ज़रूरत से ज़्यादा आत्मविश्वास रहा है|

हैरानी वाली बात यह है कि मीडिया के एक वर्ग और टीवी चैनलों ने ऐसा माहौल बना दिया जैसे कि भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को बस कप चूमने के लिए तैयार रहना चाहिए| कौन नहीं जानता कि क्रिकेट मे कभी भी कुछ भी हो सकता है| पीछे मुड कर देखें तो वेस्ट इंडीज, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और भारत जैसी मजबूत टीमों को ज़ोर का झटका धीरे से लगता आया है| बेशक भारत खिताब का दावेदार माना गया था और भारतीय समर्थकों के साथ साथ खिलाड़ियों का उत्साह भी सातवें आसमान तक पहुँच गया था| लेकिन जब आँख खुली तो न्यूजीलैंड हैसियत का आईना दिखा चुका था| भले ही पूरे टूर्नामेंट मे भारतीय मीडिया अपनी टीम के मध्य क्र्म को कोसता रहा पर आख़िरी मैच मे शुरुआती बल्लेबाज़ों ने लुटिया डुबो दी|

एक कालम मे पहले ही चेताया था कि टीम इंडिया को कोई नहीं हरा सकता परंतु अत्यधिक आत्मविश्वास हार का कारण बन सकता है| दुनियाँ भर के क्रिकेट एक्सपर्ट्स कह रहे थे कि न्यूजीलैंड जैसे मेमने की भारतीय खिलाड़ियों के सामने कोई हैसियत नहीं है और उसे हराने मे ज़रा भी वक्त नहीं लगेगा| जब गावसकर, कपिल, सचिन,लक्ष्मण और तमाम पूर्व चैम्पियन भारत को विजेता मान चुके थे तो ऐसा क्या हुआ कि भारतीय खिलाड़ी अपने बुने जाल मे फँस गये! शायद प्रतिद्वंदी को कमजोर आँकने की भूल भारी पड़ी| किसे पता था कि दो दिन तक चले सेमीफाइनल में भारतीय खिलाड़ियों का सिर चढ़ा नशा उतर जाएगा| पूजा, हवन, मंत्र तंत्र कुछ भी भारतीय टीम के काम नहीं आया|

कोई मानें ना माने लेकिन भारतीय क्रिकेट को एक सबक ज़रूर मिला है कि ज़्यादा घमंड और दूसरे को कमजोर आँकने की ग़लती कभी कभार बहुत भारी पड़ जाती है| बेहतर यह होगा कि भारतीय मीडिया, क्रिकेट प्रेमी और खिलाड़ी खेल को खेल भावना से लें और पागलपन से दूर रहें| हार-जीत खेल का हिस्सा हैं और इसे स्वीकारने वाला ही असल विजेता होता है|

2 thoughts on “अहंकार और पागल मीडिया ले डूबे

  1. बिल्कुल सही बात है श्रीमान जी अगर भारतीय मीडिया खिलाड़ीयों की तारीफ करने की जगह अगर इनकी गलतियों को सुधारने के बारे में बात करता और विरोधियों को कम आंकने की कोशिश ना करता तो शायद आज हमारी टीम फ़ाइनल में होती और सायद विश्व कप भी जीतती. लेकिन हमारा मीडिया तिल का ताड़ करने मे माहिर हैं. और अगर भारतीय टीम को ये भी पता होना चाहिए था कि हमारा मिडिल ऑर्डर (4)ने वर्ल्ड कप में रन ही कब बनाए हैं तो यही भारतीय टीम का सबसे बड़ा कारण है हारने का..

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  2. Vety True Bro. Semi finals se pahle hee Rohit bhai ke Chacha ka Bachpan se video aur interviw aisey dikhaya jaisaye final jeet liya hai.Ek channel ne toh PM ka luck har world cup ki jeet se jod diya.Indra ji vapis aayi Manmohan ji Vapis aaye aur aab Modi ji vapis PM hain World Cup toh hamara hai.Aab Modi ji ka toh banta dhar kar diya.Infact Over confidence n rain giving 211 runs has made them pagal.Next day asliyat pata lag gai.Never think yr opponent week.Cricket khel ki yahi beauty hai. !!!

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