जापानियों से नहीं डरती— साक्षीमलिक

राजेंद्र सजवान

कुछ समय पहले ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक ने एक साक्षात्कार में कहा था कि जापानी पहलवानों को हराने के लिए उन्हें दूसरा जन्म लेना पड़ेगा| संभवतया रियो ओलंपिक में जीते कांस्य पदक के बाद के खराब प्रदर्शन को देखते हुए उन्होने ऐसा कहा होगा, क्योंकि लंबे समय तक वह अपनी ख्याति के अनुरूप नहीं लड़ पा रही थी| आज यहाँ एसेक्स एथलेटिक फुटवेयर द्वारा ब्रांड एम्बेसडर घोषित किए जाने के अवसर पर साक्षी ने कई रहस्यों से परदा हटाया और कुछ सवालों का जवाब एक पेशेवर खिलाड़ी की तरह दिया| जापानी पहलवानों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें 2020 के टोक्यो ओलंपिक में मेजबान पहलवानों से निपटना होगा और पूरी तरह तैयार हैं| पहले जो कुछ कहा, महज मज़ाक था|

फिलहाल उसने कज़ाकिस्तान में होने वाली विश्व चैंपियनशिप के लिए 62 किलो वर्ग में श्रेष्ठ भारतीय पहलवान की हैसियत से भाग लेने का हक पा लिया है| वहाँ पहले छह स्थानों पर रहने वाले सभी पहलवान टोक्यो ओलंपिक का टिकट पा जाएँगे| साक्षी चाहती है कि पहले ही प्रयास में कामयाब हो जाए और फिर साल भर ओलंपिक की तैयारी में जुट जाए| उसके अनुसार इस बार पदक का रंग बदलने का इरादा रखती है| एक सवाल के जवाब में साक्षी ने माना कि ओलंपिक पदक जीतने के बाद वह सम्मान समारोहों में ज़्यादा व्यस्त रही और यही उसके प्रदर्शन में गिरावट का कारण बना| लेकिन अब वह पूरी तरह जाग गई है और पूरा ध्यान कुश्ती पर है| उसे अपनी कमज़ोरियों का पता चल गया है और घर बाहर सब जगह बस इसी पर काम कर रही है|

इस कोशिश में उसे ओलंपियन ससुर सत्यवान .कादयान और पति सत्यव्रत भरपूर मदद कर रहे हैं| एक सवाल से वह हमेशा बचती रही हैं कि किसे अपना गुरु और द्रोणाचार्य अवॉर्ड का हकदार मानती हैं| साक्षी ने स्पष्ट किया कि ईश्वर सिंह दहिया, मंदीप और कुलदीप मलिक समयसमय पर उसके कोच रहे लेकिन द्रोणाचार्य अवॉर्ड के हकदार उसके ससुर सत्यवान ही हैं, जोकि मास्टर चंदगी राम के शिष्य रहे हैं| उसने स्वीकार किया कि कभी कभार बढ़त बनाने के बाद सुस्त हो जाती है, जिसकी कीमत भी चुकानी पड़ी है| वह इस कमज़ोरी को जानती है और गंभीरता से अभ्यास कर रही है| बजरंग पूनिया के बाद वह एसेक्स से जुड़ी है और मानती है कि यह बदलाव उसके प्रदर्शन को निखारेगा| जब उसकी ताक़त के बारे में पूछा गया तो साक्षी ने कहा कि पिछड़ने के बाद वह आक्रामक हो जाती है,जैसा कि रियो में कांस्य पदक की भिड़ंत में उसने कर दिखाया और देश के लिए पहला ओलंपिक पदक जीतने वाली महिला पहलवान बनीं| इस सिलसिले को वह आगे भी जारी रखना चाहती है| एसेक्स फुट वेयर को उसने बेहद असरदार बताया और कहा कि अपनी पसंद के जूते पहनकर प्रदर्शन में सुधार होगा।

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