क्रिकेट पर काहे की मेहरबानी?

राजेंद्र सजवान

आम तौर पर जब कभी भी कोई भारतीय खेल अपना रोना रोता है तो वह सबसे पहले क्रिकेट को कोसता है या अपनी कमज़ोरियों को छिपाने के लिए क्रिकेट की आड़ ज़रूर लेता है| बहानेबाज खेल संघ और खेल आयोजक मीडिया के सामने यहाँ तक कहते हैं कि उनके खेल को क्रिकेट खा गई या आरोप लगाया जाता है कि मीडिया क्रिकेट के साथ पक्षपात करता है और सज़ा बाकी खेलों को भुगतनी पड़ती है|

हालाँकि यह सही है और काफ़ी हद तक क्रिकेट मीडिया का लाड़ला खेल है| दूसरी तरफ ओलंपिक खेलों की प्रचार माध्यम अनदेखी करते आ रहे हैं| हैरानी वाली बात यह है कि जब कोई क्रिकेट खिलाड़ी, इकाई, बोर्ड और अन्य ज़िम्मेदार लोग किसी घोटाले में फँसते हैं या नियमों से खिलवाड़ करते हैं, तब खुद को बचाने के लिए तरह तरह- तरह के बहाने बनाए जाते हैं|सट्टेबाज़ी, मैच फिक्सिंग,बॉल टेम्परिंग और डोपिंग में देश-विदेश के अनेक क्रिकेटर फँसते आए हैं इनमें आस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, भारत,दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, वेस्ट इंडीज आदि देशों के क्रिकेट खिलाड़ियों की संख्या अधिकाधिक रही है| लेकिन बहुत कम खिलाड़ी हैं जिन्हें ऐसी सज़ा दी गई हो, जिससे कोई सबक मिलता हो|

मोहम्मद अज़हरुद्दीन, श्रीसंत, अजय शर्मा, मनोज प्रभाकर ऐसे भारतीय क्रिकेटर हैं जिन्हें बड़ी सज़ा दी गई लेकिन डोपिंग में फँसे खिलाड़ियों को सज़ा देने के मामले में भारतीय बोर्ड और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिति(आईसीसी) ने हमेशा से लचर रवैया अपनाया| डोपिंग के ताज़ा शिकार बने पृथ्वीशॉ, गजराज और अक्षय को जो सज़ा सुनाई है वह ना सिर्फ़ मज़ाक लगती है अपितु क्रिकेट की मनमानी और चौधराहट को भी दर्शाती है| उन्हें सारे नियम क़ानून ताक पर रख कर आठ महीनें के लिए प्रतिबंधित किया गया, जोकि मज़ाक लगता है|

एक ओर तो नाडा द्वारा बेक़ुसूर होने का प्रमाण पत्र मिलने के बाद वाडा ने भारतीय ओलंपिक पदक की उम्मीद पहलवान नरसिंह यादव को चार साल का प्रतिबंध झेलना पड़ा, उसका अंतरराष्ट्रीय करियर लगभग ख़त्म कर दिया गया| दूसरी तरफ बड़े से बड़े अपराध के लिए क्रिकेटरों को माफ़ किया जाता रहा है| भारतीय बोर्ड और आईसीसी कहतें हैं कि उन्हें नाडा और वाडा से कोई सरोकार नहीं| उनके लिए अलग क़ायदे क़ानून किस लिए? क्यों क्रिकेट को विशेष दर्जा दिया जा रहा है|

जब क्रिकेट पर पूरा देश मरा जा रहा है तो फिर क्रिकेटरों के बड़े गुनाहों को क्यों माफ़ कर दिया जाना चाहिए?ओलंपिक खेलों में डोप लेने वाले खिलाड़ियों को दुनियाँ भर में गंभीर सज़ा दी जाती हैं, जिससे कई खिलाड़ियों के जीवन बर्बाद हो गये| अमेरिका रूस, जर्मनी, हंगरी, इंग्लैंड, चीन, केन्या, जमैका भारत आदि देशों के चैम्पियन खिलाड़ियों को डोपिंग की भारी कीमत चुकानी पड़ी| लेकिन क्रिकेटर पर मेहरबानी क्यों और कब तक?

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