मामला गंभीर,मर्यादा ताक पर!

राजेंद्र सजवान

इसमे दो राय नहीं कि भारतीय क्रिकेट अपने सुनहरे दौर से गुजर रहीं है और एक से एक बेहतरीन खिलाड़ी विश्व मानचित्र पर भारत की पहचान को बल दे रहे हैं| 1983 के विश्व कप की जीत ने देश में जो माहौल बनायाहै उसे लेकर दूसरे खेल भले ही जलें भुने पर क्रिकेट को छू पाना उनके बूते की बात नहीं है| लेकिन क्रिकेट की कामयाबी नें जहाँ एक ओर खिलाड़ियों और खेल का कारोबार करने वालों को बेहतर जीवनस्तर दिया है तो कुछ एक को कामयाबी हजम नहीं हो पा रही|

पिछले कुछ दिनों के घटनाक्र्म पर नज़र डालें तो भारतीय टीम के विश्व कप में बाहर होने के बाद बहुत कुछ ऐसा घटित हुआ है जिसे भद्र्जनों के खेल के लिए अपशगुन ही कहा जा सकता है|मान लिया, न्यूजीलैंड के विरुद्ध सेमीफाइनल में हारना आत्महत्या करने जैसा था और आलोचकों को बोलने का मौका भी मिल गया| लेकिन वेस्टइंडीज के विरुद्ध पहले टी 20 मुक़ाबले में युवा गेंदबाज नवदीप सैनी की शानदार गेंदबाजी पर क्रिकेटर से सांसद बने गौतम गंभीर का पूर्व खिलाड़ियों बिशनसिंह बेदी एवम् चेतन चौहान से भिड़ना बेबात की बात लगता है|

सैनी की शानदार गेंदबाजी से भारत मैच जीतने में सफल रहा| लेकिन पता नहीं क्यों गौतम गंभीर ने गड़े मुर्दे उखाड़ डाले और बेदी, चौहान के साथ वाकयुद्ध शुरू कर दिया| ऐसा माना जाता है कि बेदी ने 2013 में सैनी को दिल्ली टीम मे चुने जाने पर विरोध किया था| तब बेदी और चौहान चयन समिति के प्रमुख थे| गंभीर ने भारत की जीत का श्रेय सैनी को दिया और कटाक्ष करते हुए लिखा कि सैनी ने मैच शुरू होने से पहले ही बेदी और चौहान केरूप में दो विकेट चटखा दिए थे|

संभवतया, गंभीर कहना चाह रहे थे कि जिस खिलाड़ी को दिल्ली की टीम में चुने जाने का विरोध हुआ वह देश के लिए कमाल कर गया| ज़ाहिर है गंभीर का दोनों वरिष्ठ खिलाड़ियों से पुराना विवाद है लेकिन अब वह और उँचे उठ गये हैं जबकि बेदी कह रहे हैं कि गंभीर की तरह नीचे गिरना नहीं चाहते| ट्वीटर पर गंभीर और बेदी ने एक दूसरे को हर तरह से नीचा दिखाया| हैरानी वाली बात यह है कि गंभीर ने यहाँ तक कह डाला कि बेदी ने अपने बेटे अंगद के चयन के लिए तमाम क़ायदे क़ानून तक तोड़ डाले और इस काम में चौहान ने बेदी का साथ दिया|

दोनों वरिष्ठ खिलाड़ियों ने गंभीर को अपने पद और रुतबे की याद दिलाई और कहा कि उन्हें सोच तोल कर बोलना चाहिए| खैर डीडीसीए तो हमेशा से आरोपों और विवादों का घर रही है| बेदी, चेतन और कीर्ति आज़ाद ने मौके बेमौके अनेकों बार दिल्ली की क्रिकेट के कर्णधारों पर उंगली उठाई और गंभीर आरोप लगाए| लेकिन विश्व कप की हार के बाद जिस प्रकार प्रसाद और मांजरेकर ने देश के सर्वकालीन श्रेष्ठ बल्लेबाज सुनील गावस्कर पर फब्तियाँ कसी उसे लेकर भी क्रिकेट प्रेमियों में ख़ासा गुस्सा है| विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे विवाद तो हमेशा से होते आए हैं पर गंभीर के गुस्से की गंभीरता को समझा जा सकता है|

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