बजरंग को लक्ष्य से ना भटकाए मीडिया– योगेश्वर 

राजेंद्र सजवान

ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर पहलवान ने भारतीय मीडिया से आग्रह किया है कि टोक्यो ओलंपिक तक भारतीय पहलवानों और ख़ासकर, बजरंग पूनिया को लेकर ऐसी कोई खबर ना उड़ाएँ जिससे पहलवानों के प्रदर्शन पर बुरा असर पड़े| पिछले दिनों कुछ समाचारपत्रों में बजरंग और संगीता फोगाट के संभावित विवाह की खबरों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए योगेश्वर ने कहा कि यदि दोनों पहलवान और उनके परिवार राज़ी हैं तो किसी को क्या एतराज हो सकता है|

लेकिन मीडिया में बयान देने का सही समय नहीं है| योगी के अनुसार बजरंग का पहला लक्ष्य ओलंपिक गोल्ड जीतने का है जिसके लिए वह वर्षों से मेहनत कर रहा है| गुरु रामफल, बजरंग का परिवार और पूरा देश उस पर उम्मीद लगाए बैठा है| बेशक, वह भी जी जान से मेहनत कर रहा है| ऐसे में उसकी शादी की बेबुनियाद खबरें उड़ाना और ध्यान भटकाना समझदारी नहीं है| बजरंग पूनिया टोक्यो ओलंपिक के भारतीय दावेदारों में सबसे उपर है| खुद मीडिया कहता है कि यदि कोई भारत के लिए पदक जीत सकता है तो वह निसंदेह बजरंग ही है|

मीडिया यह भी मानता है कि 65 किलो में यह पहलवान अपने गुरु भाई योगेश्वर जैसा प्रतिभावान है| विश्व नंबर एक, एशियाड, कामनवेल्थ में स्वर्ण और कई अन्य पदक उसके नाम दर्ज हैं| योगेश्वर और बजरंग को उंगली पकड़कर सिखाने वाले द्रोणाचार्य रामफल ने भी योगेश्वर की भावनाओं का सम्मान किया और कहा कि बजरंग का पहला काम ओलंपिक खेलना और पदक जीतना है| उसे 130 करोड़ उम्मीदों पर खरा उतरना है, जिसके लिए वह पूरी तरह तैयार है| लेकिन मसालेदार खबरें परोसने वालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि ऐसा करने से किसी भी खिलाड़ी के प्रदर्शन और तैयारी पर बुरा असर पड़ सकता है|

योगी ने बताया कि बजरंग पूरी तैयारी में है और जार्जिया में गोल्ड जीत कर उसने प्रमाण भी दे दिया है| उन्हें अपने पहलवान पर पूरा भरोसा है और एकतरफ़ा खबर उड़ाने वालों को भी उसका मनोबल बढ़ाना चाहिए| योगी और कोच रामफल ने माना कि फोगाट परिवार देश के सम्मानित कुश्ती परिवारों में है और यदि उनके संबंध बनते हैं तो इससे बेहतर क्या हो सकता है! योगेश्वर नें उन अफवाहों को भी निराधार बताया जिनमें कहा जा रहा है कि बजरंग सोनीपत स्थित योगेश्वर अकादमी में ट्रेनिंग नहीं करता|

जवाब में कोच रामफल ने कहा कि बजरंग अधिकांश समय कैंप और विदेशों में ट्रेनिंग में व्यस्त रहता है| ऐसे में अपने अखाड़े आने का समय कम ही मिल पाता है| लेकिन जब भी वक्त मिलता है जूनियर खिलाड़ियों को अपने अनुभवों से परिचित कराने और टिप्स देने ज़रूर आता है|

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