रणजी खिलाड़ी ओलंपियन पर भारी|

राजेंद्र सजवान
भले ही क्रिकेट को अन्य खेलों की तरह राष्ट्रीय खेल फ़ेडेरेशन का दर्जा मिल जाए और उसे नाडा अपनी गिरफ़्त में लेने मे सफल हो जाए किंतु बाकी खेलों और क्रिकेट के बीच का अंतर समाप्त होने वाला नहीं है| इस बारे में जब देश के ओलंपिक खेलों से जुड़े खिलाड़ियों और खेल प्रशासकों से पूछा जाता है तो अधिकांश बड़ी बेरूख़ी से जवाब देते हुए कहते हैं कि क्रिकेट को नाडा के नियंत्रण में लाना भी अन्य खेलों के लिए कोई साजिश हो सकती है|जब एक रणजी क्रिकेटर हॉकी, कुश्ती, फुटबॉल, एथलेटिक आदि खेलों में कई अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबले खेल चुके खिलाड़ी के सामने अकड़ कर चलता है और खुद को खुदा समझता है तो देश में क्रिकेट के दबदबे को समझा जा सकता है|

रणजी ट्राफ़ी राष्ट्रीय क्रिकेट चैंपियनशिप के बारे में हर कोई जानता है किंतु रंगास्वामी कप, संतोष ट्राफ़ी और तमाम खेलों की राष्ट्रीय चैंपियनशिप के बारे में उन खेलों से जुड़े खिलाड़ी तक नहीं जानते|इस संवाददाता ने भारतीय रेलवे, सेना, पुलिस, बैंक बोर्ड, तेल कंपनियों मे कार्यरत खिलाड़ियों से जानना चाहा तो ज़्यादातर माना कि रणजी, आईपीएल, एक-दो टेस्ट खेल चुके क्रिकेटर उन पर हमेशा भारी रहे हैं| विभाग के बड़े-छोटे अफ़सर क्रिकेटरों के आगे-पीछे सलाम ठोकते फिरते हैं| उन्हें स्पेशल दर्जा, स्पेशल प्रोमोशन और तमाम सुविधाएँ दी जाती हैं|

एक अनपढ़ क्रिकेट खिलाड़ी का सम्मान दूसरे खेल के पोस्ट ग्रेजुएट और ओलंपिक एवम् विश्व पदक विजेता से कहीं उपर होता है|हॉकी ओलम्पियनों के अनुसार उन्हें भी क्रिकेट की जीत पर गर्व महसूस होता है लेकिन जब ध्यानचन्द जैसे महान खिलाड़ी की उपेक्षा होती है तब पता चलता है कि क्रिकेट और बाकी खेलों मे क्या फ़र्क है| जब सुनील क्षेत्री देश के कप्तान की हैसियत से फुटबॉल प्रेमियों को मैच देखने बुलाते हैं, जब हॉकी, एथलेटिक, तैराकी, कुश्ती, मुक्केबाज़ी आदि खेलों को देखने मुट्ठीभर दर्शक पहुँचते हैं, तब पता चलता है कि भारत ओलंपिक में क्यों फिसड्डी है और क्यों देश का नाम खराब हो रहा है|

बेशक, इसमें क्रिकेट का दोष नहीं पर बाकी खेलों को चलानेवाले मक्कार, अवसरवादी और भ्रष्ट अधिकारी तो दोषी हैं ना| ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ज़्यादातर ओलंपिक खेलों की बागडोर अनपढ़, गँवार, माफ़िया और ऐसे गुंडातंत्र के हाथ है जो खुद कभी खिलाड़ी नहीं रहे| ऐसे लोग भला क्रिकेट का क्या मुकाबला करेंगे! हालाँकि क्रिकेट भी नेता-सांसदों का प्रिय खेल है और धनाढ्य एवम् अपराध तंत्र क्रिकेट को पालपोष रहा है|

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