खेल अवार्ड: फिर खिलवाड़

राजेंद्र सजवान

राष्ट्रीय खेल अवार्डों के लिए लिए गठित 12 सदस्यीय समिति ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया है इस बारे में देश की राय और असंतुष्टों की प्रतिक्रियाएँ आनी शुरू हो गई हैं और कुछ एक दिनों में इस प्रयोग की सार्थकता सरे आम हो जाएगी| यह पहला मौका है जबकि अलग अलग अवार्डों के लिए अलग समितियों का गठन नही किया गया|बेशक, बजरंग पूनिया को राजीव गाँधी खेल रत्न के लिए चुना जाना स्वागतयोग्य फ़ैसला है परंतु पैरालंपिक में रजत पदक जीतने वाली दीपा मलिक को बजरंग के समकक्ष आँकना और वह भी तीन साल बाद, थोड़ा अटपटा लगता है| कुछ अन्य नामों पर भी खेल हलकों में कानाफूसी शुरू हो गई है|

कई नाराज़ खिलाड़ी भी सामने आने लगे हैं|पूर्व अवॉर्डी, खिलाड़ी, खेल जानकार और खेल हस्तियों में से ज़्यादातर चाहते हैं कि पैरालंपिक खेलों के लिए अलग प्लेटफार्म बेहतर रहेगा ताकि अधिकाधिक पैरा खिलाड़ी सम्मान पा सकें| भारतीय खेलों पर सरसरी नज़र डालें तो ओलंपिक पदक विजेता खेलों, कुश्ती, मुक्केबाज़ी, निशानेबाज़ी में चयन समिति को एक भी ऐसा कोच नज़र नहीं आया जिसे द्रोणाचार्य दिया जा सके|यह ना भूलें कि हाल के वर्षों में भारतीय पहलवानों ने गजब का दम खम दिखाया है और ओलंपिक , एशियाड, कामनवेल्थ एवम् वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदकों का अंबार लगा दिया है| ऐसा ही शानदार प्रदर्शन मुक्केबाज़ और निशानेबाज़ भी कर रहे हैं|

तो क्या उनकी तैयारी बिना कोच के चल रही है? कहाँ है, चैम्पियन पैदा करने वाले कोच? भारतीय हॉकी और कबड्डी की हालत किसी से छिपी नहीं है| कबड्डी ओलंपिक का हिस्सा नहीं है और एशियाड में क्या हुआ सब जानते हैं|यही हाल हॉकी का हुआ फिरभी इन खेलों के हिस्से एक-एक द्रोणाचार्य और अर्जुन अवॉर्ड आते हैं तो उंगली उठना स्वाभाविक है| हॉकी में तो एक ध्यानचन्द अवॉर्ड भी न्योछावर कर दिया गया| कुछ असंतुष्टों के अनुसार क्रिकेट, हॉकी, पैरा स्पोर्ट्स में दो-दो और तीन एथलीटों को एक साथ अर्जुन अवॉर्ड दिया जाना समझदारी कदापि नहीं है| हैरानी वाली बात बॉडी बिल्डिंग को सम्मान देना भी है|

अर्थात कुश्ती, निशानेबाज़ी, मुक्केबाज़ी खुद को छला गया महसूस कर रहे हैं|बहुत से नाराज़ कोच कह रहे हैं कि अर्जुन और द्रोणाचार्य अवार्डों के लिए तय नियमों और मापदंडों की अनदेखी की गई है| मुक्केबाज़ी से जुड़े लोग तो यह भी कह रहे हैं कि मैरीकाम को चयन समिति मे जगह देना और फिर उसका खुद हटना खेल के लिए नुकसानदेह रहा| यह भी कहा जा रहा है कि जिन खेलों को चयन समिति में जगह मिली उनके मन की मुराद पूरी हो गई|

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