हम से विश्वासघात — पैरा खिलाड़ी

राजेंद्र सजवान
“आप हमें किसी से कमतर क्यों आँकते हैं? ऐसे में जबकि ह्मारा प्रदर्शन ओलंपिक में शामिल सामान्य खिलाड़ियों से बेहतर रहा है, हमेंबराबरी का दर्जा दें”, देश के शीर्ष पैरालम्पिक खिलाड़ियों को इस बात की नाराज़गी है कि सरकार और मीडिया उनकी तरफ ध्यान नहीं देते या दयाभाव दिखाते हुए उनकी उपलब्धियों का आकलन करते हैं| खेल रत्न से सम्मानित और दो बार के पैरालम्पिक स्वर्ण विजेता देवेन्द्र झांझरिया, रजत पदक विजेता और वर्ष 2019 के राजीव गाँधी खेल रत्न के लिए नामित दीपा मलिक, पैरालम्पिक समिति के अंतरिम अध्यक्ष गुरशरण सिंह और सचिव चंद्रशेखर ने पैरालम्पिक 2020 में अपने खिलाड़ियों द्वारा कम से कम दस पदक जीतने का दावा किया और पूछा कि क्या ओलंपिक में भाग लेने वाले और विशेष सम्मान पाने वाले खिलाड़ी और अधिकारी ऐसा कोई दावा कर सकते हैं? अध्यक्ष गुरशरण के अनुसार पैरलम्पिक ओलंपिक का काउंट डाउन शुरू हो चुका है और खिलाड़ियों ने कड़ी तैयारी शुरू कर दी है|ओलंपिक में पैरा खेलों की शुरुआत 1960 में हुई और भारत ने 1968 में पहली बार भाग लिया|

अब तक भारतीय खिलाड़ी 11 पदक जीत चुके हैं, जिनमें झांझरिया के दो स्वर्ण (2004 और 2016) शामिल हैं| वह एक बार फिर से टोक्यों खेलों की तैयारी में लगा है और उँचे मनोबल के साथ कहता है कि भारत के लिए तीसरा स्वर्ण भी जीतेगा| लेकिन उसे शिकायत है कि दिव्यांग खिलाड़ियों के साथ नाइंसाफी होती है| राष्ट्रीय खेल अवार्डों का हवाला देते हुए कहता है कि उनके जैसे खिलाड़ी सक्षम कहे जाने वालों से ज़्यादा पदक जीत रहे हैं किंतु बहुत कम को सम्मानित किया जाता है|झांझरिया की राय में हर साल कम से कम पाँच अर्जुन अवॉर्ड पैरा खिलाड़ियों के खाते में आने चाहिए| दीपा मलिक को अपना खेल रत्न लड़ झगड़ कर मिल रहा है| तारीफ की बात यह है कि रियो ओलंपिक में सिंधु और साक्षी के दो पदकों से देश का सम्मान बचा लेकिन पैरालम्पिक एथलीटों ने दो स्वर्ण सहित चार पदक जीत कर देश को असली खुशी दी और सम्मान में चार चाँद लगाए| इससे भी बड़ा करिश्मा हम टोक्यो 2020 में भी करने जा रहे हैं, ऐसा अध्यक्ष गुरशरण का कहना है| अध्यक्ष ने मीडिया पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जब मीडिया ही मनोबल तोड़ेगा तो दिव्यांग चैम्पियनों की कौन सुध लेगा!

प्रधानमंत्री जी उनकी भी खबर
राजेंद्र सजवान
पीवी सिंधु को विश्व चैंपियनशिप में खिताब जीतने पर पूरे देश की बधाइयाँ मिल रही हैं| देश के प्रधानमंत्री, खेल मंत्री और तमाम लोग उसके प्रदर्शन को अभूतपूर्व बता रहे हैं लेकिन किसी का भी ध्यान उन पैरा खिलाड़ियों की तरफ नहीं गया जिन्होने अपने वर्ग में विश्व खिताब जीत कर देश के सम्मान को बुलंदियों तक पहुँचाया है| वहीं बासेल में खेली गई पैरा विश्व बॅडमिंटन चैंपियनशिपमें पैरा खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण सहित कुल 12 पदक जीते| प्रोमोद भगत के नाम दो स्वर्ण रहे|

तारीफ की बात यह है रिकार्ड तोड़ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का कहीं ज़िक्र नहीं हुआ| सरकार, प्रधानमंत्री, राष्ट्र पति, मंत्रियों और मीडिया ने उनका ज़िक्र तक नहीं किया| इस उपेक्षा से पैरा खिलाड़ी और उनकी समिति के पदाधिकारी बेहद दुखी हैं|वहीं बासेल में खेली गई पैरा विश्व बॅडमिंटन चैंपियनशिपमें पैरा खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण सहित कुल 12 पदक जीते|

प्रोमोद भगत के नाम दो स्वर्ण रहे| तारीफ की बात यह है रिकार्ड तोड़ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का कहीं ज़िक्र नहीं हुआ| सरकार, प्रधानमंत्री, राष्ट्र पति, मंत्रियों और मीडिया ने उनका ज़िक्र तक नहीं किया| इस उपेक्षा से पैरा खिलाड़ी और उनकी समिति के पदाधिकारी बेहद दुखी हैं|

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