तैराकी का वंडर ब्वाय

राजेंद्र सजवान
इसमें दो राय नहीं कि तैराकी में भारत कभी भी बड़ी ताक़त नहीं रहा| यह भी सच है कि देश में तैराकों के लिए समुचित प्रशिक्षण और प्रोत्साहन की भारी कमी है| लेकिन जब तक तैराकी फ़ेडेरेशन और खेल मंत्रालय इस खेल की पीड़ा को नहीं समझेंगे और खेल के स्तर को सुधारने के लिए गंभीर प्रयास नहीं करेंगे तब तक देश को एशियाड और ओलंपिक पदक विजेता नहीं मिलने वाले| ऐसा नहीं है कि भारत में अच्छे तैराकों की कमी है| लेकिन समस्या तब आती है जब एक स्तर के बाद प्रतिभावान और बेहतर करने की योग्यता रखने वाले खिलाड़ियों को समुचित प्रोत्साहन नहीं मिल पाता| ऐसा ही एक खिलाड़ी तैराक फिहाल चर्चा में है, जिसे भारतीय तैराकी का वंडर ब्वाय और भविष्य का चैम्पियन माना जा रहा है|

नाम है कुशाग्र रावत, जिसने छोटी सी उम्र में तरणताल में आग लगाने जैसा प्रदर्शन किया है| हाल में संपंन्न हुई एशियाई आयु वर्ग तैराकी चैंपियनशिप में कुशाग्र ने चीन, जापान, कोरिया, हॉंगकॉंग, थाईलैंड आदि देशों की मौजूदगी में पाँच स्वर्ण पदक जीत कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई| उसे चैंपियनशिप का श्रेष्ठ तैराक भी घोषित किया गया| 20 वर्षीय तैराक ने अपना काम कर दिया है| अब बारी उसकी फ़ेडेरेशन और भारतीय खेल प्राधिकरण और खेल मंत्रालय की है लेकिन उसे मंत्रालय से फिलहाल कोई सहयोग या आश्वासन नहीं मिल पाया है, जिस कारण से उसके पिता हुकम सिंह रावत बेहद चिंतित हैं| उसे बेहतर ट्रेनिंग की ज़रूरत है और उम्मीद की जानी चाहिए कि खेल मंत्रालय इस प्रतिभावान बालक को किसी बेहतर कोच के हवाले करे या विदेशों में ट्रेनिंग के लिए भेज कर उसके अंदर के चैम्पियन का संपूर्ण विकास करने में मदद की जाए|

वह मानते हैं कि आस्ट्रेलिया या अमेरिका के कोच कुशाग्र की प्रतिभा को बेहतर निखार सकते हैं| उसे कहीं भी ट्रेनिंग के लिए भेजा जाए या उनके कोाचों को भारत में ट्रेनिंग के लिए अनुबंधित किया जाए| रावत भले ही मध्यम वर्गीय परिवार से हैं लेकिन कर्ज़ लेकर अपने खर्च पर भी विदेशी कोच की सेवाएँ लेने के लिए तैयार हैं, क्योंकि अपने प्रतिभावान बेटे का दिल नहीं तोड़ना चाहते और उसे शीर्ष पर देखना चाहते हैं| बेशक, हर खिलाड़ी की तरह कुशाग्र भी ओलंपियन कहलाने का सपना देख रहा है, जिसके वह काफ़ी करीब पहुँच गया है| थाईलैंड में आयोजित आयुवर्ग चैंपियनशिप में उसने अपनी प्रिय स्पर्धा 800 मीटर 8:07.99 सेकंड का समय निकाल कर उम्मीद जगाई है| 400 मीटर फ्रीस्टाइल में भी वह बेहतर कर रहा है|

1500 और200 मीटर में भी लाजवाब है| कुशाग्र के पिता खुद एक राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी रहे हैं और मानते हैं कि बेटे का सफ़र लंबा है लेकिन समय पर उसे सरकारी प्रोत्साहन और सरंक्षण मिला तो देश का नाम रोशन करने में कसर नहीं छोड़ेगा| वह देश के खेल मंत्री किरण रिजिजू से उम्मीद लगाए हैं और उम्मीद करते हैं कि कुशाग्र को शीघ्र ही एडवांस ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा|

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.