प्रदूषण के बावजूद……

राजेंद्र सजवान
हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की सज़ा झेल रही दिल्ली डेथ चैम्ब्ऱ में तब्दील हो गई है| आम नागरिक हैरान-परेशान है और दिल्ली सरकार ने हेल्थ एमेरजेंसी घोषित कर दिल्ली वालों के दिल दहला दिए हैं| लेकिन स्थानीय खेल और खिलाड़ियों को जैसे कोई परवाह नहीं है| भले ही स्कूल कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए गये हैं पर स्कूल, कालेज और क्लब स्तरीय खिलाड़ी बदस्तूर खेलना जारी रखे हुए हैं| ऐसे में भारतीय फुटबाल टीम के कप्तान सुनील छेत्री का वह बयान याद आता है जब पंजाब केसरी के एक सवाल के जवाब में उन्होने कहा कि जब बच्चे थे और स्कूल स्तर के आयोजनों में खेलते थे तो प्रदूषण और धूल मिट्टी की कभी परवाह नहीं की लेकिन खिलाड़ी जब पेशेवर बन जाता है तो उसकी सोच भी बदल जाती है|

वह अपनी सुरक्षा पहले चाहता है और शायद दिल्ली की प्रदूषित आबो हवा में मैच नहीं खेलना चाहेगा| लेकिन देश के जाने माने क्यूरेटर,और शुभानिया क्लब के संस्थापक कोच राधेश्याम एकदम अलग राय रखते हैं| 87 साल की उम्र में भी वह नोएडा स्थित क्रिकेट अकादमी के दो सौ बच्चों के साथ ट्रेनिंग देते नज़र आए| पूछने पर कहते हैं कि आम भारतीय के खून में प्रदूषण भरा पड़ा है| उसे प्रदूषण से लड़ना बखूबी आता है| हाँ, बड़े खिलाड़ी नखरे ज़रूर दिखाते हैं| कोच उत्तम मजूमदार भी उनसे सहमत नज़र आए| तारीफ की बात यह है कि अकादमी के किसी भी खिलाड़ी के चेहरे पर मास्क दिखाई नहीं दिया|

उधर नेहरू स्टेडियम में फुटबाल लीग अपने पूरे उफान पर है बी डिवीजन लीग में भाग ले रहे सभी क्लबों के खिलाड़ी अपनी पूरी ताक़त से खेल रहे हैं| उन्हें जैसे प्रदूषण की भनक तक नहीं लेकिन कुछ क्लब अधिकारी मैचों के स्थगन की माँग कर रहे हैं| उत्तरांचल यूथ इंटरनेशनल के चीफ़ कोच पीएस पुरी, कोच वीरेंद्र नेगी, फुटबालर आशू, चेतन, जस्टिन, सुमित, जतिन, यस, कश्यप, मुकुल, अर्पित आदि का मानना है कि दिल्ली के खेल मैदानों पर खिलाड़ी रोज ही धूल मिट्टी ख़ाता है| उन्हें प्रदूषण से भला क्या फ़र्क पड़ेगा| पूर्व खिलाड़ी असलम, कमल जदली, क्रिकेटर धर्मवीर बेनीवाल, जूडो कोच द्रोणाचार्य गुरचरण और सुमन गोगी, कुश्ती कोच द्रोणाचार्य राज सिंह, महासिंह राव, रामफल और ढेरों पहलवानों को जैसे प्रदूषण की कोई परवाह नहीं है|

उनके खिलाड़ी यथावत अभ्यास जारी रखे हुएहैं| फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि खिलाड़ियों ने माहौल के हिसाब से अपनी खुराक में थोड़ा परिवर्तन किया है| वयोवृद्ध कोच राधेश्याम बताते हैं कि विदेशी पर्यटक पहाड़गंज में पटरी वालों से पकोडे समोसे खा रहे हैं| उनकी सेहत पर कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा| पता नहीं क्यों हमारे बड़े खिलाड़ी, कोच और नेता बेकार का हंगामा खड़ा किए हैं! कम से कम खिलाड़ी की सेहत पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा|

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