खूनी खेल !

राजेंद्र सजवान
नेहरू हॉकी टूर्नामेंट के फाइनल में जो कुछ हुआ उसकी दुनियाँभर में निंदा हो रही है| पंजाब पुलिस और पंजाब नेशनल बैंक के खिलाड़ियों और टीम प्रबंधकों का खेल मैदान को युद्ध के मैदान में तब्दील करना ना सिर्फ़ शर्मनाक है अपितु वापसी के लिए प्रयासरत भारतीय हॉकी पर एक बदनुमा दाग भी लगा है| लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ| आतंक की पर्याय रही पंजाब पुलिस के खिलाड़ियों ने ऐसा खूनी खेल बार बार और लगातार खेला है| यह कहना ग़लत नहीं होगा कि पंजाब का आतंकवाद ख़त्म करने वाले पुलिस महानिदेशक स्वर्गीय कंवर पाल सिंह गिल के भारतीय हॉकी फ़ेडेरेशन के अध्यक्ष बनने के बाद से पुलिस टीम के हौंसले बुलंद हुए और तमाम बड़ी टीमों पर उनका कहर टूटा|

फिर चाहे नेहरू हॉकी, शास्त्री हॉकी, सुरजीत सिंह हॉकी हो या देश के अन्य टूर्नामेंट, पंजाब पुलिस नें जम कर हॉकी बरसाई| इंडियन एयर लाइन्स, पंजाब सिंध बैंक, इंडियन आयल, ओएनजीसी, नामधारी और कई अन्य टीमों और बड़े खिलाड़ियों को अनेक बार पंजाब पुलिस की आक्रामकता का शिकार होना पड़ा| कई सिर फूटे, हड्डियाँ टूटी, दोषियों को सज़ा भी मिली पर पंजाब पुलिस ने सुधरने का नाम नहीं लिया| बेशक, पंजाब पुलिस ने देश को अनेक ओलंपियन और विश्व स्तरीय खिलाड़ी दिए लेकिन यह टीम मार काट के लिए हमेशा से बदनाम रही है अब पंजाब नेशनल बैंक टीम भी उसका अनुसरण कर रही है|

नेहरू कप के फाइनल में तो सभी हदें पार कर दी गईं| आयोजक, दोनों तरफ के अधिकारी, अंपायर और हॉकी प्रेमी हाकियाँ भाँजने का तमाशा चुपचाप देखते रहे| भले ही हॉकी इंडिया और भारतीय ओलंपिक संघ ने इस घटना को गंभीरता से लिया, निंदा की और बिगड़ैल खिलाड़ियों पर कड़ी कार्यवाही करने किी माग की है पर इतने सब से काम नहीं चलने वाला| यह ना भूलें कि नेहरू हॉकी सोसायटी देश का प्रतिष्ठित नाम है जोकि हर साल स्कूल, कालेज और बड़े स्तर पर पाँच राष्ट्रीय(कभी अंतरराष्ट्रीय) टूर्नामेंटआयोजित करती है| इसे कभी भारतीय हॉकी का तारनहार कहा जाता था| जिसे देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, बड़े कद वाले नेता सांसदों और तमाम बड़े खिलाड़ियों ने अपनी उपस्थिति से गौर्वान्वित किया| बलवीर सिंह, अजितपाल, अशोक ध्यान चन्द, ज़फ़र इकबाल, मोहम्मद शाहिद, जगबीर, धनराज पिल्ले और सैकड़ों अन्य नामवर खिलाड़ियों ने नेहरू हॉकी में अपने जौहर दिखाए| लेकिन पिछले दो दशकों में नेहरू हॉकी का कद सिकुड़ता चला गया|

सोसाइटी और टूर्नामेंट कमेटी से जुड़े लोगों का मानना है कि शिव कुमार वर्मा, केजी कक्कड़, नंदी सिंह जैसे समर्पितों के देहांत के बाद नेहरू हॉकी ग़लत हाथों में चली गई है| कुछ असंतुष्टों ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि नेहरू हॉकी को संचालित करने वाले अपने लक्ष्य से भटक गये हैं| भले ही उन्होने पंजाब पुलिस और बैंक टीम पर प्रतिबंध की घोषणा की है लेकिन असली गुनहगार खुद हैं, जिन्होने सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम नहीं किए| हद तो तब हुई जब खून ख़राबा करने वाली टीमों को पुरस्कार राशि से नवाजा गया| पूर्व खिलाड़ी और खेल प्रेमी इतने खफा है कि नेहरू हॉकी सोसाइटी और आयोजकों को प्रतिबंधित करने का दबाव बना रहे हैं|

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