क्यों डरी है निकहत?

राजेंद्र सजवान
देर से और लड़ाई लड़ने के बाद देश की बहुचर्चित मुक्केबाज़ निकहत जरीन को न्याय मिलता नज़र आता है| वह चाह बार की ओलंपिक पदक विजेता मेरीकाम के विरुद्ध लड़ना चाहती है ताकि टोक्यो ओलंपिक के लिए होने वाले क्वालीफायर में भाग ले सके, जोकि चीन में 3से 14 फ़रवरी तक आयोजित किया जाना है| फिलहाल भारतीय मुक्केबाज़ी फ़ेडेरेशन ने निकहत की उस आशंका को ग़लत साबित कर दिया जिसके चलते उसे इस बार का डर था कि उसे बिना लड़े ही बाहर कर दिया जाएगा| फ़ेडेरेशन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह उन चार महिलाओं में शामिल है जिन्हें क्वालीफायर में शुमार किया गया है| निखार ज्योति गुलिया से और मेरी काम ऋतु ग्रेवाल से लड़ेगी|

विजेता मुक्केबाज़ों का निर्णायक भिड़ंत में आमना सामना होगा| उम्मीद की जा रही है कि निकहत और मेरीकाम में से कोई एक चीन का टिकट पा सकती है| लेकिन निकहत के समर्थकों को अब यह डर सता रहा है कि कहीं यहाँ भी उसके साथ नाइंसाफी ना हो जाए| कुछ एक को लगता है कि निकहत चूँकि मेरीकाम की राह का रोड़ा बनी हुई है इसलिए उसे ज्योति के विरुद्ध भी निपटाया जा सकता है| सूत्रों की माने तो 27-28 जनवरी को होने वाले मुकाबलों के चलते मीडिया को दूर रखा जाएगा| शायद यही कारण है कि डाल में काला नज़र आता है| देखा जाए तो मीडिया के आवाज़ बुलंद करने के कारण ही मेरीकाम को लड़ने के लिए उतरना पड़ रहा है|

वरना फ़ेडेरेशन ने तो उसे सीधे टिकट दे डाली थी| निकहत जानती है कि मेरी उसके मुक़ाबले कहीं ज़्यादा वजनी है| छह बार की वर्ल्ड चैम्पियन, ओलंपिक पदक विजेता और राज्य सभा सांसद जैसे सम्मान उसके साथ जुड़े हैं| लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी| सरकार और खेल मंत्रालय को जगाया और अब दो-दो हाथ के लिए तैयार है| बेशक, पूरे देश की नज़रें एक सुपर हैवी मुक़ाबले पर लगी हैं| निकहत जीती तो एक युग की समाप्ति तय है| लेकिन मेरीकाम शायद अभी ग्लव्स टाँगने के मूड में नहीं है और कहीं तक भी जा सकती है| वैसे फ़ेडेरेशन भी गुप चुप उसका साथ दे रही है और शायद आगे भी यह सिलसिला बना रह सकता है|

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