धोनी क्यों महानतम है!

राजेंद्र सजवान
चढ़ते सूरज को नमस्कार करने की परंपरा का निर्वाह भारतीय क्रिकेट में वर्षों से होता आ रहा है| जब कभी कोई बल्लेबाज , गेंदबाज या कप्तान पूर्व खिलाड़ी से बेहतर करने की ओर अग्रसर होता है तो उसे सिर आँखों बैठा दिया जाता है| जैसा कि आजकल कप्तान विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी को लेकर चल रहा है| इसमे दो राय नहीं कि कोहली ना सिर्फ़ विश्व स्तरीय बल्लेबाज हैं अपितु उन्हें वर्तमान बल्लेबाज़ों में श्रेष्ठ भी आँका जा रहा है| कई पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि उनमें सचिन और गावस्कर जैसी योग्यता है और उनसे भी बहुत आगे निकल सकते हैं| कुछ एक लोग तो उन्हें महेंद्र सिंह धोनी से भी बेहतर कप्तान बताने पर तुले हैं|

हालाँकि हाल फिलहाल कई टीवी चैनल, क्रिकेट वेबसाइट, कमेंटेटर्स पूर्व खिलाड़ियों और विज़डन ने धोनी और कोहली के बीच तुलना करना शुरू कर दिया है और कोहली को बेहतर बता रहे हैं, क्योंकि उसकी ब्रांड वेल्यू बढ़ गई है| बेशक, क्रिकेट की दुनिया बड़ी बेरहम है| ख़ासकर, आज के युग में खिलाड़ी की महानता और योग्यता का निर्धारण क्रिकेट के गोरखधंधे में लगी एजेंसियाँ, टीवी चैनल और मीडिया द्वारा किया जा रहा है| जिसकी पकड़ जितनी मजबूत वह उतना ही बड़ा खिलाड़ी| 2004 में जब धोनी ने सौरभ गांगुली की कप्तानी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि राँची का यह स्टाइलिश लड़का एक कप्तान और विकेटकीपर के रूप में इतना सफल रहेगा कि भारतीय क्रिकेट में एक अलग हस्ताक्षर के रूप में जाना पहचाना जाएगा| 38 वर्षीय धोनी ने 350एकदिनी, 90टेस्ट और 98टी20 मैच खेल कर 17266 रन बनाए और विकेट के पीछे 829 शिकार किए|

वह तीनों आईसीसी ट्राफ़ी, वन डे विश्व कप 2011, टी 20 विश्व कप 2007 और चैम्पियंस ट्राफ़ी 2013 जीतने वाले श्रेष्ठतम कप्तान हैं| आईसीसी टेस्ट और वन डे रैंकिंग में भारतीय टीम उनके कप्तान रहते शिखर पर पहुँची| इन उपलब्धियों को देखते हुए दुनिया का कोई भी क्रिकेटर और कप्तान धोनी के आस पास नहीं पहुँचता| भले ही कप्तान कोहली बल्ले से अव्वल हैं लेकिन महानतम और धोनी के स्तर का कप्तान बनने के लिए उन्हें विश्व कप सहित कई खिताब जीतने होंगे और लगातार बेहतर प्रदर्शन करना होगा| फिरभी धोनी हमेशा हमेशा के लिए महानतम बने रहेंगे क्योंकि उनकी उपलब्धियों के सामने कोई कहीं नहीं टिकता| न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल की हार को लेकर हालाँकि उन्हें खलनायक जैसा ट्रीटमेंट दिया गया लेकिन विश्व क्रिकेट में उन्होने जो मुकाम पाया है उस तक पहुँचना शायद ही किसी के लिए संभव हो पाए| कई मायनों में वह विश्व के सर्वकलीन महानतम क्रिकेटरों में स्थान बना चुके हैं|

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