कराटे की लूट: सीबीआई जाँच की मांग

राजेंद्र सजवान
भारतीय ओलंपिक संघ(आईओए) द्वारा भारतीय कराटे संघ(केएआई) की मान्यता रद्द करने के फ़ैसले को देशभर में सराहा जा रहा है। फ़ैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करने वालों में ज़्यादातर वह हैं, जिन्हें कराटे संघ के अधिकारियों ने वर्षों से लूटा और खेल के साथ साथ हज़ारों खिलाड़ियों का भविष्य भी बर्बाद किया। उनमे से कुछ खिलाड़ियों, कोचों और पूर्व एवम् समानांतर धड़े के अधिकारियों के अनुसार कराटे में पिछले दो दशकों से गुटबाजी चल रही है लेकिन तमाम प्रतिद्वंद्वियों को दरकिनार कर कराटे त्यागराजन और भारत शर्मा ने अधिकाधिक समय खेल और खिलाड़ियों को अपने इशारों पर नचाया|

यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि दोनों महाशय जब एकजुट थे तो पूर्व कांग्रेसी मंत्री पीचिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम का वरद हस्त उन्हें प्राप्त था। उनके कार्यकाल के चलते खिलाड़ियों का जमकर शोषण हुआ।कुछ खिलाड़ियों के अनुसार उनसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेने और मेडल पाने की एवज में हज़ारों- लाखों लिए गए, जिसका कोई लिखित हिसाब किताब नहीं है। एक तरफ तो कराटे खिलाड़ियों को एशियाड और दक्षिण एशियाई खेलों से बाहर रखा गया तो दूसरी तरफ उन्हें गैर मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में उतारा गया।कुछ अधिकारियों पर अपने नकारा बेटे-बेटियों को वरीयता देने और हकदार खिलाड़ियों का शोषण करने के आरोप भी लगे हैं।

आईओए के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कई अविभावकों का मानना है कि बहुत देर हो गई है। अब तक भ्रष्ट अधिकारी हज़ारों भविष्यों से खिलवाड़ कर चुके हैं और करोड़ों लूट चुके हैं। कई प्रताड़ितों ने आईओए से शिकायत भी की लेकिन उनकी सुनवाई तब हुई जबकि कराटे ओलंपिक के दरवाजे पर खड़ा है और भारतीय खिलाड़ी सिर्फ़ मुँह ताकते रहेंगे। लुटे-पिटे और मायूस माता-पिता चाहते हैं कि उनसब अधिकारियों की सीबीआई जाँच की जाए जिन्होने पिछले बीस सालों में खेल को बुरी तरह चूसा है। यह भी माँग की जा रही है कि खेल मंत्रालय शीघ्र अतिशीघ्र कराटे संघ की मान्यता रद्द कर नये पदाधिकारियों के चयन का निर्देश दे और दोषियों की जाँच के निर्देश भी दिए जाएँ।

कुछ भुक्तभोगियों की माने तो विश्व कराटे महासंघ(डब्ल्यूकेएफ) की सहानुभूति भ्रष्ट भारतीय अधिकारियों के साथ है। लेकिन आईओए और खेल मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि कराटे के साथ खिलवाड़ करने वालों को माफ़ नहीं किया जाएगा। क्रिकेट के बाद सबसे ज़्यादा भागीदारी वाले खेल के साथ यह सब तब हो रहा है, जबकि कराटे को टोक्यो ओलंपिक में शामिल किया गया है।

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