महान फुटबालर और महान देश भक्त!

राजेंद्र सजवान
पिछले कुछ दिनों से सेनेगल के फुटबालर सादिओ माने सोशल मीडिया में छाए हुए हैं| ऐसा इसलिए नहीं की उसने कोई अभूतपूर्व गोल जमाया हो, अपने क्लब लिवर पूल के लिए करिश्माई प्रदर्शन किया हो! इसलिए भी नहीं कि उसे फ़ीफ़ा ने अफ्रीका का श्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया है| बेशक वह विश्व फुटबाल के चैम्पियन खिलाड़ियों में से एक है| 27 वर्षीय इस खिलाड़ी के खेल कौशल की तुलना ल्योन मेस्सी, रोनाल्डो और नेमार जैसे दिग्गजों से की जाती है लेकिन उसके अधिकाधिक चर्चित होने का कारण, उसका टूटा मोबाइल फ़ोन है| ऐसा नहीं है कि जादू और तंत्र मंत्र के लिए विख्यात अफ्रीका का यह खिलाड़ी किसी बाबा-फकीर के कहने पर अपने टूटे फ़ोन को संभाले हुए है|

यह तो हो ही नहीं सकता कि उसके पास इतना पैसा नहीं कि नया फ़ोन खरीद सके| दरअसल, गोल मशीन के नाम से विख्यात सेनेगल के इस खिलाड़ी ने जब अपने बचपन में फ़ीफ़ा विश्व कप में विश्व चैम्पियन फ्रांस पर अपने ग़रीब देश की जीत को देखा तो उसके मन में भी फुटबालर बनने का ख्याल आया| पिता की कमाई घर चलाने लायक भी नहीं थी, इसलिए अपने अन्य भाई-बहनों की तरह वह भी स्कूल नहीं जा सका| लेकिन एक अच्छा फुटबाल खिलाड़ी बनने की ज़िद्द उसने पाले रखी और फिर एक दिन वह भी आया जब उसे राष्ट्रीय कलर मिला और उसने देश के लिए विश्व कप भी खेला और टाप क्लबों को सेवाएँ देकर जमकर कमा रहा है|

भले ही आज वह लाखों- करोड़ों में खेल रहा है, लेकिन अपने पुराने अभाव के दिनों को नहीं भूला है| कोई माने या ना माने लेकिन आज का माने सेनेगल के खिलाड़ियों, देश की जनता, यार-दोस्तों और दुनियाँ भर के फुटबाल प्रेमियों के बीच एक आदर्श इंसान और मानवता की मिसाल के रूप में जाना जाता है| उसने नया मोबाइल क्यों नहीं खरीदा? क्यों हर साप्ताह एक करोड़ चालीस लाख रुपये का वेतन पाने वाला खिलाड़ी हँसी का पात्र बना है, इस बारे में माने ने एक साक्षात्कार में जोकुछ कहा उसे पढ़कर शायद धनाढ्य भारतीय खिलाड़ियों की आँखें भी खुल जाएँ| टूटे फ़ोन के राज के बारे में वह कहता है, ” मैं उसे ठीक करवा सकता हूँ| हज़ार फ़ोन खरीद सकता हूँ, कई जेट विमान और डायमंड घड़ियाँ खरीद सकता हूँ| लेकिन किस लिए? मैं ग़रीबी में पैदा हुआ और अच्छे कपड़े, खेलने के लिए जूते, अच्छा खाना नहीं मिला|

मैं स्कूल नहीं जा सका, अनपढ़ रह गया लेकिन मैं अपने देश के हर बच्चे को पढ़ते, अच्छा खाते और खेलते देखना चाहता हूँ| इसलिए देश में अच्छे स्कूल और स्टेडियम बना रहा हूँ| आज मुझे जो कुछ मिला देशवासियों की दुआवों से मिला है| जितना हो सकेगा उन्हें लौटाने की कोशिश कर रहा हूँ|” बेशक, माने आज के उन भारतीय खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हो सकते हैं, जोकि देश के उभरते खिलाड़ियों का रास्ता रोके हैं, उनके लिए ओलंपिक के द्वार बंद किए हैं और करोड़ों कमाने के बाद भी खेलने का मोह नहीं छोड़ रहे|
उनके लिए माने सबक हैं जोकि उम्र के फर्जीवाड़े के चलते 36-40 की उम्र में भी मैदान में डटे हुए हैं| क्रिकेट, कुश्ती, मुक्केबाज़ी और तमाम खेलों के कई चैम्पियन देश की भावी पीढ़ी को सचमुच कुछ देना चाहते हैं तो सादिओ माने का अनुसरण करें| खेल अकादमियों की आड़ में देश के खिलाड़ियों को लूटने वाले और सरकारी मदद से घर भरने वाले खिलाड़ियों मे से है कोई जो माने जैसा देशभक्त और खेल भक्त हो!

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.