क्यों सस्पेंड हुआ एस जीएफआई

राजेंद्र सजवान
देर से ही सही स्कूल गेम्स फ़ेडेरेशन आफ इंडिया को खेल मंत्रालय ने सस्पेन्ड कर दिया है| पिछले कई सालों से इस फ़ेडेरेशन को भंग करने और उसके अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की माँग की जा रही थी और अंततः सरकार के खेल मंत्रालय ने हज़ारों-लाखों पीड़ितों को राहत दिलाई है|

इस फ़ैसले में देश के सबसे लोकप्रिय दैनिक पंजाब केसरी की भूमिका बढ़ चढ़ कर रही है| पिछले तीस सालों से पंजाब केसरी नें जहाँ एक ओर राष्ट्रीय स्कूली खेलों को प्राथमिकता दी तो साथ ही अनियमितताओं को भी उजागर किया| एक दिन पहले ही हमारे अख़बार ने एसजीएफआई को भंग करने और खेलो इंडिया को विकल्प बनाने के बारे में लेख प्रकाशित किया था और खेल मंत्रालय ने वह कर दिखाया जिसकी देश भर के उभरते खिलाड़ी और उनके माता-पिता को इंतज़ार था|

ज़ाहिर है पूरे देश के स्कूली खिलाड़ी रोमांचित हैं| ख़ासकर वह, जिन्हें उम्मीद है कि अब उनके और उनके बाद के खिलाड़ियों के दिन फिरेंगे, उन्हें सॉफ सुथरा प्लेटफार्म मिलेगा और देश के खेल तरक्की करेंगे| लेकिन साथ ही एक डर भी सता रहा है कि यदि स्कूली खेलों का आयोजन नहीं होगा तो हज़ारों लाखों खिलाड़ी कैसे आगे बढ़ेंगे और कैसे उन्हें कालेजों एवम् अन्य संस्थानों में एडमिशन मिल पाएगा|

ऐसा माना जा रहा है कि खेल मंत्रालय ने पूरी तैयारी के साथ ही ठोस कदम उठाया है और खेलो इंडिया की मार्फत भारतीय स्कूली खेलों को बेहतर प्लेटफार्म देने का फ़ैसला किया गया होगा| लेकिन एसजीएफआई को सस्पेंड करने का सीधा सा मतलब है कि पाप का घड़ा भर चुका था और सैकड़ों शिकायतों के बाद खेल मंत्रालय ने सही फ़ैसला लेकर देश की भावी पीढ़ी को बचा लिया है|

कुछ लोग कह रहे हैं कि सचिव राजेश मिश्रा की करतूतों और एडिलेड में फुटबालर नितिशा नेगी की डूबने से हुई मौत को मंत्रालय ने मुद्दा बनाया है| लेकिन सिर्फ़ यही कारण नहीं है| एसजीएफआई पर खिलाड़ियों की उम्र की धोखाधड़ी, करीबियों को विदेश दौरे कराने, चयन प्रक्रिया में गड़बड़, अभिभावकों से लूट और महिला खिलाड़ियों से अश्लील हरकतें करने वाले कोचों का बचाव करने जैसे आरोप लगे|

यहाँ तक कहा गया कि राष्ट्रीय स्कूली टीमों के गठन में लेन देन भी आम था| आशंका व्यक्त की जा रही है कि सस्पेंडेड फ़ेडेरेशन वापसी के लिए प्रयास ज़रूर करेगी और बहाली के लिए कोर्ट के दरवाजे खटखटा सकती है| लेकिन सरकार संभवतया ऐसा नहीं होने देगी| एक धड़े के अनुसार, संभव है कि राजेश मिश्रा और उनके रिश्तेदारों से पूछताछ की जाए| आरोप है है कि एसजीएफआई के छाते के नीचे लगभव तीस ऐसे खेलों को भी मान्यता दी गई है जिनका कभी नाम तक नहीं सुना गया| ज़ाहिर है घोटाला बड़ा है और जाँच हुई तो बहुत से राज खुल सकते हैं|

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